कनखल का दक्षेश्वर महादेव मंदिर: जहां माता सती ने दिया था प्राण, भगवान शिव ने किया था तांडव
उत्तराखंड के हरिद्वार में स्थित कनखल धार्मिक और पौराणिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण स्थान माना जाता है। यहां स्थित दक्षेश्वर महादेव मंदिर भगवान शिव को समर्पित है और इसका संबंध राजा दक्ष के यज्ञ तथा माता सती के आत्मदाह की प्रसिद्ध पौराणिक कथा से जोड़ा जाता है। मान्यता है कि इसी स्थान पर माता सती ने अपने पिता राजा दक्ष द्वारा आयोजित यज्ञ में भगवान शिव के अपमान से दुखी होकर अपने प्राण त्याग दिए थे।
राजा दक्ष ने कराया था यज्ञ
पौराणिक कथा के अनुसार राजा दक्ष प्रजापति भगवान शिव को पसंद नहीं करते थे। उनकी पुत्री सती ने भगवान शिव से विवाह किया था, लेकिन दक्ष इस विवाह से प्रसन्न नहीं थे। एक बार राजा दक्ष ने विशाल यज्ञ का आयोजन किया और उसमें सभी देवी-देवताओं को आमंत्रित किया, लेकिन भगवान शिव और माता सती को नहीं बुलाया।
माता सती को जब पिता के यज्ञ के बारे में पता चला तो उन्होंने भगवान शिव से वहां जाने की इच्छा व्यक्त की। भगवान शिव ने बिना निमंत्रण जाने से उन्हें मना किया, लेकिन माता सती अपने पिता के घर चली गईं।
यज्ञ में हुआ भगवान शिव का अपमान
कथा के अनुसार जब माता सती यज्ञ स्थल पर पहुंचीं तो राजा दक्ष ने भगवान शिव के प्रति अपमानजनक व्यवहार किया। अपने पति का अपमान देखकर माता सती अत्यंत दुखी हुईं। वह भगवान शिव का अपमान सहन नहीं कर सकीं और यज्ञ की अग्नि में स्वयं को समर्पित कर दिया।
माता सती के आत्मदाह की खबर जब भगवान शिव को मिली तो वह अत्यंत क्रोधित हो गए। पौराणिक मान्यता के अनुसार उन्होंने सती के शरीर को उठाकर तांडव करना शुरू कर दिया। इससे तीनों लोकों में हलचल मच गई।
भगवान शिव के क्रोध से मचा हाहाकार
मान्यता है कि भगवान शिव के क्रोध को शांत करने के लिए भगवान विष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र से माता सती के शरीर के अंगों को अलग किया। जहां-जहां माता सती के अंग गिरे, वहां शक्तिपीठों की स्थापना हुई। इसी पौराणिक प्रसंग के कारण कनखल का क्षेत्र शिव और शक्ति की उपासना के लिए विशेष महत्व रखता है।
दक्षेश्वर महादेव मंदिर में भगवान शिव की पूजा दक्षेश्वर महादेव के रूप में की जाती है। श्रद्धालु यहां भगवान शिव का दर्शन कर सुख-शांति और मनोकामना की पूर्ति की प्रार्थना करते हैं।
सावन में उमड़ती है भक्तों की भीड़
कनखल स्थित दक्षेश्वर महादेव मंदिर में पूरे वर्ष श्रद्धालु पहुंचते हैं, लेकिन सावन के महीने में यहां विशेष धार्मिक माहौल देखने को मिलता है। दूर-दूर से शिव भक्त मंदिर में दर्शन और पूजा-अर्चना करने आते हैं। महाशिवरात्रि जैसे पर्व पर भी मंदिर में विशेष आयोजन किए जाते हैं।
हरिद्वार आने वाले श्रद्धालुओं के लिए कनखल का यह मंदिर धार्मिक यात्रा का महत्वपूर्ण पड़ाव माना जाता है। मंदिर से जुड़ी पौराणिक कथा भगवान शिव, माता सती और राजा दक्ष के प्रसंग को याद दिलाती है और भक्तों के बीच इसकी आस्था को और मजबूत करती है।