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जन्माष्टमी पर घर ला रहे हैं लड्डू गोपाल? जानें स्थापना से शयन तक संपूर्ण पूजा विधि और जरूरी वास्तु नियम

 

जन्माष्टमी का पर्व भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप लड्डू गोपाल की पूजा के लिए विशेष माना जाता है। कई भक्त इस दिन अपने घर में लड्डू गोपाल की नई प्रतिमा लाकर विधि-विधान से उनकी स्थापना करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार लड्डू गोपाल को घर के सदस्य और बाल स्वरूप भगवान के रूप में सेवा दी जाती है। ऐसे में उनकी स्थापना से लेकर स्नान, श्रृंगार, भोग और शयन तक हर चरण श्रद्धा और स्वच्छता के साथ करना शुभ माना जाता है।

घर में लड्डू गोपाल की स्थापना कहां करें

वास्तु मान्यताओं के अनुसार लड्डू गोपाल को घर के ईशान कोण यानी उत्तर-पूर्व दिशा में स्थापित करना शुभ माना जाता है। पूजा के लिए साफ और ऊंचा स्थान चुनें। प्रतिमा को सीधे फर्श पर रखने के बजाय चौकी या सिंहासन पर स्थापित करें। पूजा स्थल शांत और स्वच्छ होना चाहिए।

लड्डू गोपाल की प्रतिमा ऐसी जगह रखें जहां नियमित रूप से पूजा और सेवा की जा सके। उन्हें लंबे समय तक बंद अलमारी या ऐसे स्थान पर रखने से बचें जहां भक्तों का ध्यान आसानी से न पहुंच सके।

पंचामृत से कराएं स्नान

स्थापना के बाद लड्डू गोपाल का पंचामृत अभिषेक किया जाता है। पंचामृत बनाने के लिए दूध, दही, घी, शहद और शक्कर का इस्तेमाल किया जाता है। सबसे पहले भगवान को स्वच्छ जल से स्नान कराएं और फिर पंचामृत से अभिषेक करें। इसके बाद दोबारा साफ जल से स्नान कराकर मुलायम और साफ कपड़े से भगवान को पोंछें।

अभिषेक के दौरान भगवान श्रीकृष्ण के मंत्रों का जाप किया जा सकता है। इसके बाद उन्हें नए वस्त्र पहनाएं।

मनमोहक श्रृंगार करें

स्नान के बाद लड्डू गोपाल का सुंदर श्रृंगार करें। उन्हें पीले, नीले या अपनी पसंद के साफ वस्त्र पहनाए जा सकते हैं। इसके बाद मुकुट, मोर पंख, बांसुरी, माला और अन्य आभूषणों से उनका श्रृंगार करें। श्रृंगार में इस्तेमाल होने वाली सभी वस्तुएं साफ होनी चाहिए।

इसके बाद चंदन, अक्षत और फूल अर्पित करें। भगवान श्रीकृष्ण को तुलसी दल विशेष प्रिय माना जाता है, इसलिए भोग में तुलसी दल जरूर रखा जाता है।

लड्डू गोपाल को लगाएं प्रिय भोग

जन्माष्टमी पर लड्डू गोपाल को माखन-मिश्री, धनिया पंजीरी, पंचामृत, खीर, माखन, फल और मिठाई का भोग लगाया जा सकता है। भोग सात्विक होना चाहिए। इसमें प्याज और लहसुन जैसी चीजों का इस्तेमाल न करें।

भोग लगाते समय भगवान के सामने दीपक जलाएं और प्रेमपूर्वक मंत्रों का जाप करें। धार्मिक मान्यता है कि भगवान को भोग लगाने के बाद ही प्रसाद के रूप में उसे ग्रहण करना चाहिए।

रात में ऐसे करें जन्माष्टमी की पूजा

जन्माष्टमी पर भगवान श्रीकृष्ण का जन्म मध्यरात्रि में माना जाता है। इसलिए रात 12 बजे भगवान की विशेष पूजा की जाती है। इस दौरान घंटी बजाकर आरती करें, श्रीकृष्ण के जन्म का उत्सव मनाएं और उन्हें माखन-मिश्री सहित अन्य प्रसाद अर्पित करें।

'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र का जाप करना भी शुभ माना जाता है। इसके बाद परिवार के सभी सदस्य भगवान का आशीर्वाद लें और प्रसाद ग्रहण करें।

पूजा के बाद लड्डू गोपाल को कराएं शयन

जन्माष्टमी की पूजा और उत्सव के बाद लड्डू गोपाल को रात्रि में शयन कराया जाता है। उनके लिए छोटा और साफ बिस्तर तैयार करें। मौसम के अनुसार हल्के या गर्म वस्त्र और बिस्तर का इस्तेमाल किया जा सकता है। शयन से पहले भगवान को दूध या हल्का भोग अर्पित करने की परंपरा भी कई घरों में है।