×

पितृ पक्ष में कहीं आप भी तो नहीं कर रहे ये गलतियां? श्राद्ध करते समय भूलकर भी ना करें ये काम

 

पितृ पक्ष को हिंदू धर्म में पूर्वजों को याद करने और उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का समय माना जाता है। इन दिनों पितरों के लिए तर्पण, श्राद्ध और दान-पुण्य किया जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस अवधि में पूर्वज अपने वंशजों के करीब आते हैं और उनके निमित्त किए गए कर्मों से तृप्त होते हैं। यही वजह है कि पितृ पक्ष के दौरान कुछ कामों से दूरी बनाने की सलाह दी जाती है। माना जाता है कि इन नियमों की अनदेखी करने से पितरों की नाराजगी हो सकती है और घर में परेशानियां बढ़ सकती हैं।

पितृ पक्ष में शुभ काम करने से बचें

पितृ पक्ष को उत्सव और मांगलिक कार्यों के बजाय पूर्वजों के स्मरण का समय माना गया है। इसलिए इस दौरान शादी, सगाई या गृह प्रवेश जैसे शुभ कार्य करने से बचना चाहिए। नया कारोबार शुरू करने या किसी बड़े शुभ आयोजन को भी इस अवधि के बाद करने की सलाह दी जाती है। इसी तरह नई गाड़ी, मकान या जमीन जैसी बड़ी खरीदारी को भी टालना उचित माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इन दिनों व्यक्ति को अपना ध्यान पितरों के प्रति श्रद्धा और उनके निमित्त किए जाने वाले कर्मों पर रखना चाहिए।

नए कपड़ों की खरीदारी भी ना करें

पितृ पक्ष के दौरान नए कपड़े खरीदने और पहनने को लेकर भी कुछ धार्मिक मान्यताएं हैं। कहा जाता है कि इन दिनों व्यक्ति को सादगी और शांत भाव के साथ रहना चाहिए। इसलिए नए वस्त्रों की खरीदारी से दूरी बनाने की परंपरा भी निभाई जाती है। हालांकि, अगर किसी जरूरतमंद या ब्राह्मण को दान देने के लिए वस्त्र खरीदे जा रहे हैं, तो इसे पुण्य का कार्य माना जाता है।

मांस-मदिरा से बनाएं दूरी

श्राद्ध और तर्पण के दिनों में खान-पान की शुद्धता पर विशेष जोर दिया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पितृ पक्ष में मांस, मदिरा और दूसरे तामसिक पदार्थों का सेवन नहीं करना चाहिए। इन दिनों सात्विक भोजन करने और संयमित जीवन जीने की सलाह दी जाती है। माना जाता है कि भोजन का प्रभाव मन और व्यवहार पर भी पड़ता है, इसलिए श्राद्ध पक्ष में व्यक्ति को अपनी दिनचर्या को शांत और संयमित रखना चाहिए। पितरों के निमित्त बनाए जाने वाले भोजन में भी शुद्धता और सात्विकता का ध्यान रखा जाता है।

घर में झगड़ा करने से बचें

पितृ पक्ष के दौरान घर का माहौल शांत रखने की परंपरा है। इन दिनों परिवार के सदस्यों को आपसी विवाद, गुस्से और बेवजह के झगड़ों से बचने की सलाह दी जाती है। मान्यता है कि पूर्वजों के लिए किए जा रहे श्राद्ध कर्म का वातावरण भी श्रद्धा और शांति से भरा होना चाहिए। अगर घर में लगातार कलह होती रहे, तो इससे पूजा-पाठ का भाव भी प्रभावित होता है। इसलिए इन दिनों परिवार के साथ प्रेम और सम्मान से रहने की कोशिश करनी चाहिए और छोटी बातों को विवाद में बदलने से बचना चाहिए।