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Ambubachi Mela 2026: 3 दिन तक क्यों बंद रहता है कामाख्या मंदिर? जानिए मां कामाख्या धाम से जुड़े 4 रहस्य

 

असम के नीलांचल पर्वत पर स्थित प्रसिद्ध शक्तिपीठ Kamakhya Temple में हर वर्ष आयोजित होने वाला अंबुबाची मेला देश के सबसे बड़े धार्मिक आयोजनों में से एक माना जाता है। वर्ष 2026 में यह मेला 22 जून से 25 जून तक मनाया जाएगा। इस दौरान लाखों श्रद्धालु मां कामाख्या के दर्शन और आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए यहां पहुंचते हैं।

अंबुबाची मेले की सबसे खास बात यह है कि इस अवधि में मंदिर के कपाट तीन दिनों तक बंद रहते हैं। इसे देवी की वार्षिक रजस्वला (मासिक धर्म) अवधि से जोड़कर देखा जाता है। आइए जानते हैं कामाख्या मंदिर से जुड़े चार प्रमुख रहस्यों और मान्यताओं के बारे में।

1. तीन दिन के लिए क्यों बंद हो जाता है मंदिर?

धार्मिक मान्यता के अनुसार, अंबुबाची पर्व के दौरान मां कामाख्या रजस्वला होती हैं। इसी कारण मंदिर के कपाट तीन दिनों तक बंद रखे जाते हैं और इस दौरान नियमित पूजा-अर्चना भी नहीं होती।

तीन दिन पूरे होने के बाद विशेष अनुष्ठानों के साथ मंदिर के द्वार दोबारा खोले जाते हैं। इसके बाद भक्तों को दर्शन का अवसर मिलता है।

2. यहां नहीं है देवी की मूर्ति

कामाख्या मंदिर की सबसे अनोखी विशेषता यह है कि यहां देवी की पारंपरिक प्रतिमा नहीं है। गर्भगृह में प्राकृतिक रूप से निर्मित एक पवित्र योनिकुंड की पूजा की जाती है, जिसे शक्ति का प्रतीक माना जाता है।

यही कारण है कि यह मंदिर तांत्रिक साधना और शक्ति उपासना का प्रमुख केंद्र माना जाता है।

3. अंबुबाची वस्त्र का क्या है महत्व?

मंदिर के कपाट बंद होने से पहले गर्भगृह में एक सफेद वस्त्र रखा जाता है। मान्यता है कि तीन दिनों के बाद यह वस्त्र लाल रंग का हो जाता है। इसे अंबुबाची वस्त्र कहा जाता है।

श्रद्धालु इस वस्त्र को अत्यंत पवित्र मानते हैं और इसे देवी के आशीर्वाद का प्रतीक समझकर अपने पास रखते हैं। धार्मिक मान्यता है कि यह वस्त्र सुख, समृद्धि और रक्षा प्रदान करता है।

4. शक्ति और सृजन का प्रतीक है यह पर्व

अंबुबाची मेला केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि नारी शक्ति और सृजन क्षमता का उत्सव भी माना जाता है। यह पर्व प्रकृति, उर्वरता और जीवन चक्र के सम्मान का संदेश देता है।

भारत की प्राचीन परंपराओं में स्त्री शक्ति को सृष्टि का आधार माना गया है और अंबुबाची मेला इसी विचार को विशेष रूप से दर्शाता है।

लाखों श्रद्धालुओं का लगता है जमावड़ा

अंबुबाची मेले के दौरान देश-विदेश से साधु-संत, तांत्रिक, श्रद्धालु और पर्यटक कामाख्या धाम पहुंचते हैं। इस दौरान मंदिर परिसर और आसपास का क्षेत्र आध्यात्मिक गतिविधियों से सराबोर हो जाता है।

अंबुबाची मेला 2026 की प्रमुख तिथियां

  • मेला प्रारंभ: 22 जून 2026
  • मंदिर के कपाट बंद: 22 जून से 24 जून तक
  • मंदिर के कपाट खुलना: 25 जून 2026
  • विशेष दर्शन एवं पूजा: 25 जून से आगे

धार्मिक मान्यता और आस्था

कामाख्या मंदिर को भारत के प्रमुख शक्तिपीठों में गिना जाता है। मान्यता है कि यहां देवी सती का योनिभाग गिरा था, जिसके कारण यह स्थान शक्ति उपासना का अत्यंत पवित्र केंद्र बन गया।