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Ahoi Ashtami Mala: अहोई माता की पूजा आज रवियोग में, इसकी माला कब उतारी जाती है?
 

 

अहोई अष्टमी का व्रत संतान की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि की कामना के लिए रखा जाता है। इस साल 1 नवंबर 2026, रविवार को अहोई अष्टमी मनाई जा रही है। इस दिन माताएं सुबह से निर्जला व्रत रखती हैं और शाम को अहोई माता की विधि-विधान से पूजा करती हैं। इस पर्व पर अहोई माता की पूजा के साथ चांदी की स्याऊ या चांदी के मोतियों वाली माला पहनने की भी विशेष परंपरा है। कई महिलाओं के मन में सवाल रहता है कि अहोई अष्टमी की माला कब पहननी चाहिए और इसे कब उतारना शुभ माना जाता है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अहोई माता की पूजा के बाद स्याऊ की माला धारण की जाती है। इसे उतारने के भी कुछ पारंपरिक नियम बताए गए हैं।

अहोई अष्टमी पर बन रहा रवि पुष्य योग

इस बार अहोई अष्टमी पर रवि पुष्य नक्षत्र और सर्वार्थ सिद्धि योग का संयोग बन रहा है। ज्योतिषीय मान्यताओं में रवि पुष्य योग को शुभ कार्यों और पूजा-पाठ के लिए विशेष फलदायी माना जाता है।

जयपुर के पंचांग के अनुसार, 1 नवंबर को अष्टमी तिथि दोपहर 2 बजकर 51 मिनट से शुरू होकर 2 नवंबर को दोपहर 1 बजकर 10 मिनट तक रहेगी। अहोई अष्टमी की पूजा का शुभ समय शाम 5 बजकर 44 मिनट से 7 बजकर 1 मिनट तक है। तारों के दर्शन का समय शाम लगभग 6 बजकर 8 मिनट बताया गया है।

अहोई अष्टमी पर कैसे पहनें स्याऊ की माला?

अहोई अष्टमी के दिन महिलाएं चांदी की स्याऊ और चांदी के मोतियों वाली माला की पूजा करती हैं। पूजा से पहले माला को अहोई माता के चित्र या प्रतिमा के सामने रख दें। इसके बाद रोली, अक्षत और फूल अर्पित करके माला का पूजन करें।

व्रत कथा सुनते समय हाथ में गेहूं के सात दाने और दक्षिणा रखने की परंपरा भी है। कथा पूरी होने के बाद अहोई माता का स्मरण करके स्याऊ की माला गले में धारण की जाती है। कई परिवारों में माला को लाल धागे या मौली में पिरोकर पहनने की परंपरा है।

अहोई माता की माला कब उतारी जाती है?

अहोई अष्टमी पर पहनी जाने वाली चांदी की माला को लेकर अलग-अलग परिवारों में अलग परंपराएं प्रचलित हैं। सामान्य मान्यता के अनुसार, इस माला को दिवाली तक गले में पहना जाता है।

कुछ परिवारों में दिवाली के दिन मां लक्ष्मी की पूजा के बाद माला उतारी जाती है, जबकि कुछ जगह गोवर्धन पूजा या भाई दूज के दिन इसे उतारने की परंपरा है। इसलिए माला उतारते समय अपने घर की पुरानी परंपरा का पालन करना चाहिए।

लाइव हिन्दुस्तान में प्रकाशित जानकारी के अनुसार, दिवाली के बाद किसी शुभ दिन अहोई की माला उतारकर उसे गुड़ का भोग लगाया जाता है। इसके बाद जल के छींटे देकर आदरपूर्वक साफ स्थान पर रखा जाता है।

माला उतारने के बाद क्या करें?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, माला उतारने के बाद उसे साफ करके सुरक्षित स्थान पर रखना चाहिए। कुछ परिवारों में अगले साल अहोई अष्टमी पर पूजा के समय माला में चांदी के नए दाने जोड़ने की परंपरा भी है।

मान्यता है कि अहोई माता की कृपा से संतान को लंबी आयु, अच्छा स्वास्थ्य और जीवन में सुख-समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है।

अहोई अष्टमी पर इन बातों का रखें ध्यान

  • पूजा के समय स्याऊ की माला को अहोई माता के सामने रखकर पूजन करें।

  • व्रत कथा सुनने के बाद माला धारण करें।

  • तारों को अर्घ्य देकर व्रत का पारण करें।

  • माला उतारने के लिए अपने परिवार की परंपरा का पालन करें।

  • माला को उतारने के बाद साफ और सुरक्षित स्थान पर रखें।