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Adhik Maas 2026 Upay: अधिकमास खत्म होने से पहले कर लें ये काम, मां लक्ष्मी और भगवान शिव की बरसेगी कृपा

 

हिंदू धर्म में अधिकमास को बेहद पवित्र और पुण्यदायी माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह महीना भगवान विष्णु, माता लक्ष्मी और भगवान शिव की आराधना के लिए विशेष फलदायी होता है। वर्तमान में अधिकमास चल रहा है, जो 15 जून को समाप्त हो जाएगा। इसके बाद ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की शुरुआत होगी।

ऐसे में जिन लोगों ने अभी तक अधिकमास में दान-पुण्य, जप-तप या धार्मिक उपाय नहीं किए हैं, उनके पास अभी भी शुभ कार्य करने का अवसर है। मान्यता है कि इस अवधि में किए गए दान और पूजा-पाठ से कई गुना अधिक पुण्य फल प्राप्त होता है तथा जीवन में सुख-समृद्धि और खुशहाली आती है।

अधिकमास में करें दान-पुण्य

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अधिकमास में जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र, जल, फल और धन का दान करना अत्यंत शुभ माना जाता है। इस दौरान किए गए दान से पापों का क्षय होता है और पुण्य की प्राप्ति होती है। गरीबों, जरूरतमंदों और ब्राह्मणों को दान देने का विशेष महत्व बताया गया है।

मां लक्ष्मी की कृपा के लिए करें ये उपाय

अधिकमास में प्रतिदिन माता लक्ष्मी की पूजा करना शुभ माना जाता है। शाम के समय घर के मंदिर में घी का दीपक जलाएं और श्रीसूक्त या कनकधारा स्तोत्र का पाठ करें। मान्यता है कि इससे आर्थिक समस्याएं दूर होती हैं और धन-धान्य में वृद्धि होती है।

भगवान शिव को अर्पित करें ये चीजें

भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए अधिकमास में शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र और अक्षत अर्पित करें। साथ ही "ॐ नमः शिवाय" मंत्र का नियमित जाप करें। धार्मिक मान्यता है कि इससे जीवन की बाधाएं दूर होती हैं और मनोकामनाओं की पूर्ति होती है।

विष्णु पूजा का भी है विशेष महत्व

अधिकमास को पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है और यह भगवान विष्णु को समर्पित माना जाता है। इस दौरान विष्णु सहस्रनाम का पाठ, गीता का अध्ययन और भगवान विष्णु की पूजा विशेष फलदायी मानी जाती है। इससे परिवार में सुख-शांति और समृद्धि बनी रहती है।

इन कार्यों से भी मिलेगा शुभ फल

  • तुलसी के पौधे के पास दीपक जलाएं।
  • जरूरतमंदों को भोजन कराएं।
  • धार्मिक ग्रंथों का पाठ करें।
  • गौ सेवा और पक्षियों को दाना खिलाएं।
  • घर में सकारात्मक वातावरण बनाए रखें।

अधिकमास का महत्व

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अधिकमास आत्मचिंतन, भक्ति, दान और आध्यात्मिक साधना का समय होता है। इस महीने में किए गए शुभ कर्मों का फल कई गुना बढ़कर मिलता है। इसलिए अधिकमास समाप्त होने से पहले श्रद्धा और आस्था के साथ पूजा-पाठ और दान-पुण्य करना लाभकारी माना जाता है।