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कैलाश पर्वत की 3 दिन की दिव्य परिक्रमा: भगवान शिव के धाम की यात्रा में कदम-कदम पर होती है आस्था और साहस की परीक्षा

 

कैलाश पर्वत को भगवान शिव का पवित्र धाम माना जाता है। यहां की यात्रा केवल एक धार्मिक तीर्थ नहीं, बल्कि श्रद्धा, धैर्य और आत्मिक साधना की कठिन परीक्षा भी मानी जाती है। बर्फ से ढकी ऊंची चोटियों, दुर्गम रास्तों और बेहद कम ऑक्सीजन वाले वातावरण के बीच कैलाश पर्वत की परिक्रमा करना हर शिव भक्त के लिए एक दिव्य अनुभव होता है।

मान्यता है कि कैलाश पर्वत की परिक्रमा करने से जीवन के पापों से मुक्ति मिलती है और आध्यात्मिक शांति की प्राप्ति होती है। इस पवित्र यात्रा को आमतौर पर 3 दिनों में पूरा किया जाता है, जिसमें तीर्थयात्रियों को करीब 50 किलोमीटर के कठिन पहाड़ी मार्ग से गुजरना पड़ता है।

पहले दिन की परिक्रमा: यमद्वार से दिरापुक तक का सफर

कैलाश परिक्रमा की शुरुआत यमद्वार से होती है, जिसे मोक्ष का द्वार भी कहा जाता है। यहां से यात्री पैदल यात्रा शुरू करते हैं और लगभग 12 किलोमीटर का सफर तय कर दिरापुक पहुंचते हैं। रास्ते में कैलाश पर्वत के उत्तरी हिस्से के दर्शन होते हैं, जो यात्रियों के लिए सबसे भावुक और यादगार क्षणों में से एक माना जाता है।

पहले दिन का सफर ऊंचाई और ठंड के कारण चुनौतीपूर्ण होता है। कई यात्रियों को सांस लेने में परेशानी और थकान का सामना करना पड़ता है।

दूसरे दिन की परिक्रमा: सबसे कठिन पड़ाव डोलमा ला पास

कैलाश परिक्रमा का दूसरा दिन सबसे कठिन माना जाता है। इस दिन यात्रियों को करीब 18 किलोमीटर की दूरी तय करनी होती है और लगभग 18 हजार फीट से अधिक ऊंचाई वाले डोलमा ला पास को पार करना पड़ता है।

यह रास्ता बर्फ, तेज हवाओं और कम ऑक्सीजन के कारण बेहद चुनौतीपूर्ण होता है। इसी दिन गौरी कुंड के दर्शन भी होते हैं, जिसे धार्मिक दृष्टि से बेहद पवित्र माना जाता है। कई श्रद्धालु यहां प्रार्थना कर अपनी मनोकामनाएं पूरी होने की कामना करते हैं।

तीसरे दिन की परिक्रमा: यात्रा का समापन

तीसरे दिन करीब 12 से 14 किलोमीटर का सफर पूरा करने के बाद यात्री जुतुलपुक पहुंचते हैं और फिर परिक्रमा का अंतिम चरण पूरा करते हैं। इस दौरान भक्तों के मन में संतोष और आध्यात्मिक आनंद की अनुभूति होती है।

कैलाश यात्रा में आने वाली प्रमुख चुनौतियां

  • ऊंचाई के कारण ऑक्सीजन की कमी
  • अचानक बदलता मौसम
  • बर्फीले और पथरीले रास्ते
  • कई घंटों तक पैदल चलने की कठिनाई
  • शारीरिक थकान और मानसिक दबाव

कैलाश परिक्रमा से पहले कैसे करें तैयारी?

कैलाश यात्रा पर जाने से पहले शारीरिक और मानसिक रूप से तैयार होना बेहद जरूरी है। यात्रियों को कुछ महीने पहले से नियमित वॉक और एक्सरसाइज शुरू करनी चाहिए। इसके अलावा गर्म कपड़े, जरूरी दवाएं, ऑक्सीजन सपोर्ट और अन्य यात्रा सामग्री साथ रखना जरूरी होता है।

कैलाश पर्वत की परिक्रमा केवल पहाड़ों को पार करने का सफर नहीं है, बल्कि यह विश्वास, धैर्य और भगवान शिव के प्रति अटूट आस्था की यात्रा है। यही कारण है कि हर साल हजारों श्रद्धालु इस दिव्य यात्रा को अपने जीवन का सबसे खास अनुभव मानते हैं।