अमेरिका में 1000 डॉलर की दवा भारत से 25 डॉलर में मिलने पर महिला ने उठाए हेल्थकेयर सिस्टम पर सवाल
सोशल मीडिया पर इन दिनों एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें एक महिला ने अमेरिका के हेल्थकेयर सिस्टम को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। वीडियो में महिला दावा करती नजर आती है कि जिस दवा की कीमत अमेरिका में करीब 1000 डॉलर बताई गई थी, वही दवा उसे एक भारतीय कंपनी से मात्र 25 डॉलर में मिल गई।
महिला के इस अनुभव ने सोशल मीडिया पर नई बहस छेड़ दी है और यह वीडियो इंटरनेट पर तेजी से शेयर किया जा रहा है। वीडियो में महिला अमेरिकी स्वास्थ्य व्यवस्था की तुलना करते हुए इसे “स्कैम जैसा सिस्टम” तक कहती नजर आती है। उसका कहना है कि एक ही दवा की कीमत में इतना बड़ा अंतर आम लोगों के लिए बेहद चौंकाने वाला है।
जैसे ही यह वीडियो सामने आया, फेसबुक, इंस्टाग्राम और एक्स (पूर्व में ट्विटर) जैसे प्लेटफॉर्म्स पर यूजर्स की प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई। कई लोगों ने महिला के दावे को सही ठहराते हुए कहा कि दवाओं की कीमतों में अंतर वैश्विक स्तर पर एक गंभीर मुद्दा है, जबकि कुछ यूजर्स ने कहा कि कीमतें अलग-अलग देशों की नीतियों, टैक्स और हेल्थकेयर सिस्टम पर निर्भर करती हैं।
कुछ नेटिजन्स ने यह भी तर्क दिया कि भारत में जेनरिक दवाओं की उपलब्धता और कम कीमतों का फायदा मरीजों को मिलता है, जिससे कई दवाएं अन्य देशों की तुलना में काफी सस्ती हो जाती हैं। वहीं, अमेरिकी हेल्थकेयर सिस्टम को लेकर पहले से ही कई बार महंगे इलाज और दवाओं को लेकर आलोचना होती रही है।
इस वीडियो ने एक बार फिर वैश्विक हेल्थकेयर मॉडल और दवा मूल्य निर्धारण को लेकर बहस शुरू कर दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि अलग-अलग देशों में दवाओं की कीमतें कई कारकों पर निर्भर करती हैं, जिनमें रिसर्च कॉस्ट, पेटेंट, सरकारी नीतियां और सब्सिडी शामिल होती हैं।
फिलहाल यह वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा का बड़ा विषय बना हुआ है और लोग इसे लेकर अलग-अलग राय व्यक्त कर रहे हैं। यह मामला एक बार फिर इस बात को उजागर करता है कि हेल्थकेयर सिस्टम और दवा कीमतों में अंतर वैश्विक स्तर पर कितना बड़ा मुद्दा है।