Numerology के चक्कर में महिला को नहीं मिला फ्लैट! मकान मालकिन ने नंबर मैच न होने पर ठुकराया आवेदन
मुंबई में किराए पर घर ढूंढना पहले से ही किसी चुनौती से कम नहीं माना जाता। लेकिन हाल ही में सामने आया एक मामला सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया है, जहां एक महिला को फ्लैट सिर्फ इसलिए नहीं मिला क्योंकि उसका अंक ज्योतिष (Numerology) नंबर मकान मालकिन के अनुसार शुभ नहीं था।
यह अनोखा मामला इंटरनेट पर तेजी से वायरल हो रहा है। लोग इसे अंधविश्वास और व्यक्तिगत पसंद के बीच की बहस बता रहे हैं। कई यूजर्स इस घटना पर हैरानी जता रहे हैं, जबकि कुछ का कहना है कि मकान मालिक अपने हिसाब से किरायेदार चुनने के लिए स्वतंत्र होते हैं।
क्या है पूरा मामला?
जानकारी के मुताबिक, महिला मुंबई में किराए के लिए फ्लैट देखने गई थी। बातचीत के दौरान मकान मालकिन ने सामान्य जानकारी लेने के बाद महिला की जन्मतिथि और उससे जुड़े अंक ज्योतिष के नंबर के बारे में पूछा।
बताया जाता है कि नंबरों का मिलान करने के बाद मकान मालकिन ने कहा कि महिला का न्यूमरोलॉजी नंबर उनके अनुसार अनुकूल नहीं है। इसी वजह से उन्होंने फ्लैट किराए पर देने से इनकार कर दिया।
महिला ने इस अनुभव को सोशल मीडिया पर साझा किया, जिसके बाद यह मामला देखते ही देखते वायरल हो गया।
सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस
महिला की पोस्ट सामने आने के बाद इंटरनेट पर लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। कुछ यूजर्स ने कहा कि महानगरों में किराए पर घर लेने के दौरान पहले ही कई तरह की शर्तों का सामना करना पड़ता है और अब अंक ज्योतिष के आधार पर भी लोगों को घर न मिलना हैरान करने वाला है।
वहीं, कुछ लोगों का कहना था कि मकान मालिक अपनी व्यक्तिगत मान्यताओं और पसंद के आधार पर किरायेदार चुन सकते हैं। हालांकि, कई यूजर्स ने इसे भेदभावपूर्ण और तर्कहीन फैसला बताया।
पहले भी सामने आ चुके हैं ऐसे मामले
मुंबई, बेंगलुरु और दिल्ली जैसे बड़े शहरों में किराए पर घर देने को लेकर पहले भी कई अनोखे मामले सामने आ चुके हैं। कहीं अविवाहित लोगों को फ्लैट नहीं दिया जाता, तो कहीं पालतू जानवर रखने, खान-पान या पेशे के आधार पर शर्तें रखी जाती हैं।
अब इस घटना ने दिखाया है कि कुछ लोग अंक ज्योतिष जैसी मान्यताओं को भी किरायेदार चुनने का आधार बना रहे हैं।
इंटरनेट पर वायरल हो रही कहानी
फिलहाल यह मामला सोशल मीडिया पर खूब चर्चा बटोर रहा है। कई लोग इसे हास्यास्पद बता रहे हैं, तो कुछ इसे व्यक्तिगत विश्वास का मामला मान रहे हैं।
हालांकि, इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या किराए पर घर देने के फैसले में व्यक्तिगत मान्यताओं को प्राथमिकता दी जानी चाहिए, या फिर ऐसे निर्णय केवल व्यावहारिक और निष्पक्ष आधार पर होने चाहिए।