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क्या कभी उस 300 साल पुराने भयानक श्राप सेमुक्त हो पाएगा भानगढ़ ? वीडियो में जाने क्या यूहीं भटकती रहेंगी आत्माएं ?

 

राजस्थान के अलवर जिले में अरावली की पहाड़ियों के बीच स्थित भानगढ़ का किला, भारत के सबसे रहस्यमयी और डरावने स्थानों में से एक माना जाता है। इतिहास, किंवदंतियों और अंधविश्वास का ऐसा मेल इस किले को मिला है कि यह जगह आज भी भारतीय पुरातत्व विभाग (ASI) द्वारा सूर्यास्त के बाद प्रवेश निषिद्ध घोषित की जा चुकी है।लेकिन सवाल अब भी जिंदा है – क्या भानगढ़ कभी उस तीन सौ साल पुराने भयानक श्राप से मुक्त हो पाएगा, जिसने इसे वीरान कर दिया?

<a href=https://youtube.com/embed/jIjhhrAJneA?autoplay=1&mute=1><img src=https://img.youtube.com/vi/jIjhhrAJneA/hqdefault.jpg alt=""><span><div class="youtube_play"></div></span></a>" style="border: 0px; overflow: hidden"" title="Hanuted Story Of Bhangarh Fort Alwar | भानगढ़ किले का इतिहास, रहस्य, भूतिया कहानी, रात की रिकॉर्डिंग" width="695">
भानगढ़ का इतिहास – वैभव से वीरानी तक
भानगढ़ का निर्माण सन् 1573 में आमेर के राजा भगवंत दास ने अपने पुत्र माधो सिंह के लिए करवाया था। एक समय यह किला व्यापार, संस्कृति और वैभव का केंद्र हुआ करता था। किले की वास्तुकला और योजना इसे समृद्ध नगर बनाने के इरादे को दर्शाती है। लेकिन यह वैभव ज्यादा समय तक टिक नहीं पाया।किंवदंती है कि एक भयानक तांत्रिक श्राप ने इस नगरी को एक झटके में वीरान कर दिया। और तब से यह किला मात्र खंडहरों का ढेर बनकर रह गया है।

श्राप की रहस्यमयी कथा
भानगढ़ से जुड़ी सबसे चर्चित कहानी एक सुंदर राजकुमारी रत्नावती और एक तांत्रिक सिंधु सेवड़ा की है। कहा जाता है कि रत्नावती की सुंदरता दूर-दूर तक प्रसिद्ध थी, और सिंधु उस पर मोहित हो गया था। उसने तांत्रिक विद्या से उसे वश में करने की कोशिश की, लेकिन उसकी चाल पकड़ में आ गई और राजकुमारी ने उसे मरवा दिया।मरते समय सिंधु सेवड़ा ने श्राप दिया कि भानगढ़ की पूरी नगरी नष्ट हो जाएगी और कोई भी यहां शांतिपूर्वक नहीं रह पाएगा। कहते हैं, उसके बाद अचानक भानगढ़ उजड़ गया – न कोई युद्ध, न कोई बीमारी, बस एक दिन ऐसा आया जब सबकुछ खत्म हो गया।

रहती हैं भूतिया परछाइयां?
स्थानीय लोग और पर्यटक बताते हैं कि किले में आज भी अजीब घटनाएं घटती हैं। कोई आवाजें सुनता है, कोई परछाइयों को चलता देखता है, तो कोई कहता है कि उसने संगीत या स्त्री की चीखें सुनी हैं।

ASI ने भी चेतावनी बोर्ड लगाया है:
"सूर्यास्त के बाद और सूर्योदय से पहले इस परिसर में प्रवेश करना सख्त वर्जित है।"
यह चेतावनी केवल डर फैलाने के लिए नहीं, बल्कि कई असामान्य घटनाओं की पुष्टि के बाद लगाई गई है।

विज्ञान बनाम विश्वास
भानगढ़ का रहस्य केवल लोककथाओं तक सीमित नहीं है। इतिहासकारों का मानना है कि यह नगरी प्राकृतिक आपदाओं, पानी की कमी या व्यापारिक मार्गों में बदलाव की वजह से उजड़ी हो सकती है। वहीं वैज्ञानिक दृष्टिकोण कहता है कि मानव मन डर और पूर्वाग्रह से भरा होता है, और यही वजह है कि हर छाया उन्हें भूत लगती है।लेकिन एक बात तय है – इतिहास हो या विज्ञान, भानगढ़ की वीरानी में कुछ तो अनकहा है।