मई-जून में ही क्यों पड़ती है सबसे ज्यादा गर्मी? जानिए इसके पीछे का असली कारण
हर साल जैसे ही मई और जून का महीना आता है, भारत के ज्यादातर हिस्सों में भीषण गर्मी अपने चरम पर पहुंच जाती है। तापमान तेजी से बढ़ता है, लू चलने लगती है और दिनभर चिलचिलाती धूप लोगों को परेशान कर देती है। ऐसे में अक्सर सवाल उठता है कि आखिर सबसे ज्यादा गर्मी इन्हीं महीनों में क्यों पड़ती है?
इसका सबसे बड़ा कारण पृथ्वी की सूर्य के चारों ओर घूमने की स्थिति और सूर्य की किरणों का कोण है। वैज्ञानिकों के अनुसार गर्मी तब बढ़ती है जब सूर्य की किरणें पृथ्वी पर ज्यादा सीधी पड़ती हैं। मई और जून के दौरान उत्तरी गोलार्ध, जहां भारत स्थित है, सूर्य की ओर ज्यादा झुका होता है। इस वजह से सूरज की रोशनी सीधे और अधिक तीव्रता के साथ धरती पर पड़ती है।
इसके अलावा इन महीनों में दिन भी काफी लंबे हो जाते हैं। लंबे दिन का मतलब है कि धरती को सूरज की गर्मी ज्यादा समय तक मिलती रहती है, जिससे तापमान लगातार बढ़ता जाता है। रातें छोटी होने के कारण धरती को ठंडा होने का पर्याप्त समय नहीं मिल पाता।
एक और अहम कारण यह है कि मई-जून के दौरान वातावरण में नमी (humidity) भी कई इलाकों में कम हो जाती है, जिससे गर्मी और ज्यादा तीखी महसूस होती है। खासकर उत्तर और मध्य भारत के क्षेत्रों में शुष्क हवाएं चलने से लू का असर बढ़ जाता है।
विशेषज्ञ यह भी बताते हैं कि इस समय जमीन पहले से ही गर्म हो चुकी होती है क्योंकि अप्रैल से ही तापमान बढ़ना शुरू हो जाता है। ऐसे में मई-जून तक आते-आते यह अपने चरम पर पहुंच जाता है।
इसी वजह से स्कूलों की छुट्टियां भी इन्हीं महीनों में रखी जाती हैं ताकि बच्चों को तेज गर्मी और लू से बचाया जा सके।
सोशल मीडिया पर भी लोग हर साल इस मौसम को लेकर तरह-तरह के मजेदार कमेंट्स करते हैं। कोई कहता है “AC ही असली लाइफ लाइन है,” तो कोई लू को “फ्री सॉना सेशन” बता देता है।
कुल मिलाकर, मई और जून में पड़ने वाली भीषण गर्मी कोई अचानक होने वाली घटना नहीं है, बल्कि यह पृथ्वी की प्राकृतिक स्थिति, सूर्य की किरणों के कोण और मौसम चक्र का नतीजा है।