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ट्रेन की सीट में रुई क्यों नहीं भरी जाती? 99% या​त्रियों को नहीं पता वजह, किस मैटेरियल का होता है यूज; जानें
 

 

ट्रेन में सफर के दौरान आपने सीट और बर्थ पर बिछे गद्देदार कवर को जरूर देखा होगा। देखने में ये सीटें काफी मुलायम और आरामदायक लगती हैं, इसलिए कई लोगों के मन में सवाल आता है कि आखिर इनके अंदर रुई भरी होती है या कोई दूसरा मैटेरियल इस्तेमाल किया जाता है। दरअसल, रेलवे की सीटों में आमतौर पर साधारण रुई का इस्तेमाल नहीं किया जाता। इसके पीछे आराम के साथ-साथ सुरक्षा, टिकाऊपन और रखरखाव से जुड़ी कई वजहें हैं।

सीट के अंदर कौन सा मैटेरियल होता है?

ट्रेन की गद्देदार सीटों और बर्थ में आमतौर पर फोम और अन्य कुशनिंग सामग्री का इस्तेमाल किया जाता है। फोम को सीट के आकार के अनुसार लगाया जाता है और उसके ऊपर मजबूत कवर चढ़ाया जाता है। अलग-अलग कोच और सीट के डिजाइन के अनुसार इस्तेमाल होने वाली सामग्री और उसकी संरचना अलग हो सकती है।

रुई की जगह फोम क्यों?

रुई समय के साथ दबकर अपनी मूल मोटाई खो सकती है। लगातार यात्रियों के बैठने और सोने से रुई में गांठें पड़ने और वह असमान होने की संभावना रहती है। इसके मुकाबले कुशनिंग फोम लंबे समय तक अपने आकार को बनाए रखने के लिए ज्यादा उपयुक्त होता है।

सफाई और रखरखाव भी बड़ी वजह

ट्रेन में रोजाना बड़ी संख्या में यात्री सफर करते हैं। ऐसे में सीटों की साफ-सफाई और रखरखाव बेहद जरूरी होता है। रुई के अंदर धूल और नमी जमा हो सकती है, जबकि फोम आधारित कुशन को उचित कवर के साथ साफ रखना अपेक्षाकृत आसान होता है। जरूरत पड़ने पर सीट के कवर या कुशनिंग हिस्से को बदला भी जा सकता है।

आराम के साथ मजबूती जरूरी

रेलवे की सीटों को केवल मुलायम बनाना ही उद्देश्य नहीं होता। उन्हें लगातार इस्तेमाल, वजन और लंबे समय तक टिके रहने की जरूरत होती है। इसलिए ऐसी सामग्री का चयन किया जाता है जो यात्रियों को पर्याप्त कुशनिंग देने के साथ लंबे समय तक इस्तेमाल में भी काम आए।

यही वजह है कि ट्रेन की सीट बाहर से जितनी साधारण दिखाई देती है, उसके पीछे आराम, मजबूती, साफ-सफाई और रखरखाव को ध्यान में रखकर सामग्री का चयन किया जाता है। अगली बार ट्रेन की सीट पर बैठते समय शायद आप उसके अंदर इस्तेमाल होने वाले मैटेरियल के बारे में जरूर सोचेंगे।