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भारत में कहां सबसे ज्यादा गुटखा खाती हैं महिलाएं? सर्वे में सामने आए चौंकाने वाले आंकड़े

 

भारत में तंबाकू और गुटखा सेवन को लेकर किए गए नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे (NFHS) में कई हैरान करने वाले तथ्य सामने आए हैं। सर्वे के अनुसार, देश के उत्तर-पूर्वी राज्यों में महिलाएं भी बड़ी संख्या में गुटखा और अन्य धूम्ररहित तंबाकू उत्पादों का सेवन करती हैं। खास बात यह है कि कुछ राज्यों में महिलाओं की तंबाकू सेवन की दर पुरुषों के काफी करीब पहुंच गई है।

सबसे चौंकाने वाला आंकड़ा मिजोरम से सामने आया है, जहां करीब 62 प्रतिशत महिलाएं गुटखा या अन्य धूम्ररहित तंबाकू उत्पादों का सेवन करती हैं। यह देश में महिलाओं के बीच सबसे अधिक दर्ज की गई दरों में शामिल है।

नॉर्थ-ईस्ट में ज्यादा है तंबाकू सेवन

सर्वे के मुताबिक, उत्तर-पूर्व भारत के कई राज्यों में गुटखा और अन्य चबाने वाले तंबाकू उत्पादों का इस्तेमाल सामाजिक और सांस्कृतिक स्तर पर अपेक्षाकृत अधिक देखा गया। यही वजह है कि यहां महिलाओं में भी इसका प्रचलन देश के अन्य हिस्सों की तुलना में ज्यादा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि खान-पान की स्थानीय परंपराएं, सामाजिक स्वीकार्यता और तंबाकू उत्पादों की आसान उपलब्धता इसके प्रमुख कारण हो सकते हैं।

स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा

डॉक्टरों के अनुसार, गुटखा और अन्य धूम्ररहित तंबाकू उत्पादों का नियमित सेवन स्वास्थ्य के लिए बेहद नुकसानदायक है। इससे मुंह का कैंसर, गले का कैंसर, मसूड़ों की बीमारी, दांतों की समस्या और हृदय रोग जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।

विश्व स्वास्थ्य विशेषज्ञ भी तंबाकू सेवन को रोकने के लिए लगातार जागरूकता अभियान चलाने पर जोर देते रहे हैं।

जागरूकता बढ़ाने की जरूरत

विशेषज्ञों का कहना है कि महिलाओं में बढ़ते तंबाकू सेवन को देखते हुए उत्तर-पूर्वी राज्यों में विशेष जागरूकता अभियान चलाने की जरूरत है। साथ ही, युवाओं और किशोरियों को तंबाकू के दुष्प्रभावों के बारे में जानकारी देना भी जरूरी है।

सरकार और स्वास्थ्य एजेंसियां समय-समय पर तंबाकू नियंत्रण कार्यक्रम चलाती हैं, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि स्थानीय स्तर पर समुदायों की भागीदारी और शिक्षा के जरिए ही इस समस्या पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकता है।

सर्वे ने खींचा गंभीर मुद्दे की ओर ध्यान

नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे के आंकड़ों ने यह स्पष्ट किया है कि तंबाकू सेवन केवल पुरुषों तक सीमित नहीं है। खासकर उत्तर-पूर्वी राज्यों में महिलाओं के बीच भी इसकी व्यापकता चिंता का विषय बनी हुई है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि गुटखा और अन्य तंबाकू उत्पादों से दूरी बनाकर ही कैंसर समेत कई गंभीर बीमारियों के खतरे को कम किया जा सकता है। ऐसे में जागरूकता, रोकथाम और समय पर परामर्श ही इस चुनौती से निपटने का सबसे प्रभावी उपाय माना जाता है।