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सरकारी नौकरी में प्रोफेशनलिज्म कहां गया? जनता के साथ ऐसा व्यवहार क्यों, वीडियो वायरल 

 

सरकारी दफ्तरों में काम कराने के लिए पहुंचने वाले आम लोगों की सबसे बड़ी उम्मीद होती है कि उनकी बात ध्यान से सुनी जाए और उन्हें सही जानकारी व सम्मान के साथ मदद मिले। लेकिन कई बार सोशल मीडिया पर ऐसे वीडियो और शिकायतें सामने आती हैं, जिनमें सरकारी कर्मचारियों के व्यवहार को लेकर सवाल उठाए जाते हैं।

सरकारी नौकरी वालें इतने बदतमीज क्यों होते हैं?

पब्लिक से कैसे डील किया जाता हैं इन्हें पता ही नहीं होता हैं, प्रोफेशनलिज्म नाम की चीज इनके अंदर होती ही नहीं हैं।

जिस जनता की सेवा के लिए इन्हें नौकरी मिली हैं उसी से ये बदतमीजी से बात करते हैं। pic.twitter.com/WISshridH4

— Prem Bhardwaj (@premkumarcbn01) September 11, 2026

सरकारी नौकरी वालें इतने बदतमीज क्यों होते हैं?

पब्लिक से कैसे डील किया जाता हैं इन्हें पता ही नहीं होता हैं, प्रोफेशनलिज्म नाम की चीज इनके अंदर होती ही नहीं हैं।

जिस जनता की सेवा के लिए इन्हें नौकरी मिली हैं उसी से ये बदतमीजी से बात करते हैं। pic.twitter.com/WISshridH4

— Prem Bhardwaj (@premkumarcbn01) September 11, 2026


लोगों का कहना है कि किसी भी सरकारी कर्मचारी से जब कोई नागरिक अपने काम या समस्या को लेकर संपर्क करता है, तो उसके साथ सम्मानजनक और प्रोफेशनल तरीके से बातचीत होनी चाहिए। आखिर सरकारी सेवाओं का उद्देश्य ही आम जनता की मदद करना है।

यह बात भी सही है कि हर सरकारी कर्मचारी को एक जैसा कहना उचित नहीं होगा। बड़ी संख्या में कर्मचारी पूरी जिम्मेदारी और ईमानदारी से अपना काम करते हैं। लेकिन जहां कहीं किसी अधिकारी या कर्मचारी द्वारा आम नागरिक से कथित तौर पर बदसलूकी, अभद्र भाषा या गैर-पेशेवर व्यवहार किया जाता है, वहां सवाल उठना स्वाभाविक है।

जनता टैक्स देती है और सरकारी व्यवस्था उसी जनता की सेवा के लिए काम करती है। इसलिए किसी भी कार्यालय में आने वाले व्यक्ति को उसकी आर्थिक या सामाजिक स्थिति से अलग सम्मान मिलना चाहिए। अगर किसी नागरिक को कोई समस्या है, तो उसका समाधान समझाने के बजाय उसे डांटना या अपमानित करना समस्या को और बढ़ा सकता है।

जरूरत इस बात की है कि सरकारी कार्यालयों में पब्लिक डीलिंग, व्यवहार और प्रोफेशनल कम्युनिकेशन पर भी उतना ही ध्यान दिया जाए जितना काम की प्रक्रिया पर दिया जाता है।

सरकारी नौकरी सिर्फ अधिकार नहीं, जिम्मेदारी भी है—और जनता से सम्मानपूर्वक व्यवहार करना उसी जिम्मेदारी का अहम हिस्सा है।