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एम्बुलेंस के अंदर क्या होता है? फोन करने के बाद मरीज तक कैसे पहुंचती है गाड़ी, जानिए अंदर की पूरी कहानी

 

जब किसी घर में अचानक कोई व्यक्ति गंभीर रूप से बीमार पड़ जाता है, सड़क हादसा हो जाता है या किसी मरीज की हालत तेजी से बिगड़ने लगती है, तो परिवार के लोग सबसे पहले मेडिकल मदद के लिए फोन करते हैं। ऐसे समय में एम्बुलेंस किसी उम्मीद से कम नहीं होती। फोन करने के बाद मरीज को जल्द से जल्द अस्पताल तक पहुंचाने की कोशिश की जाती है।

लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि जिस एम्बुलेंस को हम सिर्फ मरीज को अस्पताल पहुंचाने वाली गाड़ी समझते हैं, उसके अंदर आखिर क्या-क्या होता है? क्या वहां सिर्फ स्ट्रेचर और ऑक्सीजन सिलेंडर होता है या मरीज को रास्ते में भी जरूरी मेडिकल सहायता मिलती रहती है?

एम्बुलेंस के अंदर सबसे पहले दिखता है स्ट्रेचर

एम्बुलेंस का सबसे जरूरी हिस्सा उसका स्ट्रेचर होता है। मरीज को सुरक्षित तरीके से गाड़ी के अंदर लाने और फिर अस्पताल तक ले जाने के लिए इसे इस तरह डिजाइन किया जाता है कि जरूरत पड़ने पर उसे आसानी से बाहर निकाला जा सके।

इसके अलावा एम्बुलेंस में मरीज को स्थिर रखने के लिए जरूरी सामान भी रखा जा सकता है। हादसे में घायल व्यक्ति को उठाने या उसकी गर्दन और रीढ़ को सुरक्षित रखने के लिए कुछ एम्बुलेंस में स्पाइनल बोर्ड, स्ट्रेचर और सर्वाइकल कॉलर जैसे उपकरण भी उपलब्ध होते हैं।

ऑक्सीजन से लेकर BP मशीन तक

मरीज की हालत के मुताबिक एम्बुलेंस में ऑक्सीजन सपोर्ट बेहद अहम हो सकता है। सांस लेने में परेशानी वाले मरीज को रास्ते में ऑक्सीजन दी जा सकती है।

कई एम्बुलेंस में ब्लड प्रेशर मापने की मशीन, पल्स ऑक्सीमीटर और प्राथमिक उपचार का सामान भी मौजूद होता है। इनकी मदद से मरीज की स्थिति पर नजर रखी जा सकती है।

हालांकि, हर एम्बुलेंस एक जैसी नहीं होती। सामान्य एम्बुलेंस और एडवांस्ड लाइफ सपोर्ट एम्बुलेंस में उपलब्ध सुविधाओं में काफी अंतर हो सकता है।

क्या एम्बुलेंस चलती-फिरती ICU होती है?

यह सबसे आम गलतफहमियों में से एक है। हर एम्बुलेंस को मोबाइल ICU नहीं कहा जा सकता।

कुछ एडवांस्ड लाइफ सपोर्ट (ALS) एम्बुलेंस में मॉनिटर, डिफिब्रिलेटर, वेंटिलेशन सपोर्ट और दूसरी उन्नत सुविधाएं उपलब्ध हो सकती हैं। वहीं बेसिक एम्बुलेंस में मुख्य रूप से मरीज को सुरक्षित तरीके से अस्पताल तक पहुंचाने और जरूरी प्राथमिक सहायता देने की व्यवस्था होती है।

एम्बुलेंस में मौजूद मेडिकल स्टाफ और उपकरण भी सेवा तथा वाहन के प्रकार के अनुसार अलग हो सकते हैं।

रास्ते में मरीज की निगरानी क्यों जरूरी?

गंभीर मरीज के लिए अस्पताल तक पहुंचने का समय बेहद महत्वपूर्ण हो सकता है। रास्ते में मरीज की हालत बदल सकती है, इसलिए प्रशिक्षित मेडिकल स्टाफ उसकी स्थिति पर नजर रख सकता है और जरूरत के अनुसार उपलब्ध सुविधाओं का इस्तेमाल कर सकता है।

यही वजह है कि एम्बुलेंस सिर्फ एक वाहन नहीं, बल्कि अस्पताल तक पहुंचने से पहले मिलने वाली मेडिकल सहायता की अहम कड़ी है।

108 एम्बुलेंस सेवा कैसे मदद करती है?

भारत के कई राज्यों में 108 जैसी आपातकालीन एम्बुलेंस सेवाएं संचालित होती हैं। आपात स्थिति में कॉल मिलने के बाद उपलब्ध संसाधनों के जरिए मरीज तक एम्बुलेंस भेजने और उसे उचित स्वास्थ्य केंद्र तक पहुंचाने की प्रक्रिया शुरू की जाती है।

हालांकि, सेवा का संचालन, उपलब्ध उपकरण और प्रतिक्रिया व्यवस्था राज्य तथा स्थानीय सिस्टम के अनुसार अलग-अलग हो सकती है।

एक फोन कॉल से शुरू होती है पूरी प्रक्रिया

आपात स्थिति में एम्बुलेंस बुलाते समय मरीज की सटीक लोकेशन, समस्या का प्रकार और मरीज की स्थिति स्पष्ट बताना बेहद जरूरी होता है। इससे डिस्पैच टीम को सही संसाधन भेजने में मदद मिल सकती है।

एम्बुलेंस के अंदर मौजूद उपकरणों और मेडिकल स्टाफ का उद्देश्य अस्पताल पहुंचने से पहले मरीज को यथासंभव सुरक्षित रखना होता है। इसलिए अगली बार सड़क पर सायरन बजाती एम्बुलेंस दिखाई दे, तो याद रखिए—वह सिर्फ एक गाड़ी नहीं, बल्कि किसी मरीज के लिए अस्पताल तक पहुंचने वाली बेहद महत्वपूर्ण मेडिकल कड़ी हो सकती है।