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ऐसा क्या हुआ कि 22 साल तक महिला बनकर रहा ये शख्स, इमोशनल कर देगी स्टोरी

 

यह कहानी डोमिनिकन रिपब्लिक के फ्रैंक टैवरेस की है, जिन्हें ‘नन-मैन’ के नाम से भी जाना जाता है। फ्रैंक ने अपनी अविश्वसनीय और अनोखी जीवन यात्रा के बारे में दुनिया को बताया, जिसने न केवल उनकी व्यक्तिगत संघर्षों को बल्कि उनके साहसिक फैसलों को भी उजागर किया। यह कहानी एक दुखद घटना से शुरू होती है, जो उनके जीवन के लिए एक अहम मोड़ साबित हुई।

शुरुआत में दुखद घटनाएं

फ्रैंक जब केवल चार साल के थे, तब उनके माता-पिता का निधन हो गया। उस समय उनका परिवार आर्थिक संकट से जूझ रहा था, जिसके कारण उनके दादा-दादी उन्हें ठीक से पालने में सक्षम नहीं थे। इस वजह से उन्हें डोमिनिकन ननों के बीच एक कॉन्वेंट में भेज दिया गया। यह वही जगह थी जहां फ्रैंक ने अपना बचपन बिताया। ननों के बीच पले-बढ़े, फ्रैंक ने लड़कियों के कपड़े पहने और उनकी जीवनशैली को अपनाया। इस तरह से सात साल की उम्र तक, उन्हें यह एहसास ही नहीं हुआ कि वह एक लड़की नहीं, बल्कि लड़का हैं।

सिस्टर मार्गरीटा के रूप में जिंदगी

जैसे-जैसे फ्रैंक बड़े होते गए, उन्हें अपनी असली पहचान का अहसास हुआ, लेकिन उन्होंने अपनी पहचान को छिपाए रखने का फैसला किया। वे डरते थे कि अगर ननों को उनकी असलियत का पता चला तो वे उन्हें अस्वीकार कर देंगी। इसीलिए, उन्होंने कॉन्वेंट में सिस्टर मार्गरीटा के रूप में रहना जारी रखा, जो उनका नया नाम बन गया।

किशोरावस्था में नए अनुभव

किशोरावस्था में फ्रैंक के लिए एक नया मोड़ आया जब कुछ ननों के लिए उनमें आकर्षण उत्पन्न होने लगा। इस कारण उन्हें दूसरे कॉन्वेंट में भेज दिया गया, जहां उनका जीवन पूरी तरह से बदल गया। इस नए कॉन्वेंट में उनकी मुलाकात सिल्विया नाम की एक महिला से हुई, जिनसे उन्हें प्रेम हो गया। हालांकि, जब सिल्विया गर्भवती हुई, तो उसने फ्रैंक से कॉन्वेंट छोड़कर परिवार शुरू करने का आग्रह किया। लेकिन फ्रैंक ने इसे नकारते हुए कहा कि वह ननों को धोखा नहीं दे सकते और उन्हें छोड़ने का विचार नहीं कर सकते।

लव स्टोरी का अंत और जीवन की सच्चाई

फ्रैंक का कहना है कि वह कभी अपनी बेटी से नहीं मिल पाए, लेकिन वह उसे हमेशा अपने जीवन का प्यार मानते हैं। सिल्विया के अमेरिका चले जाने के बाद, फ्रैंक की लव स्टोरी का अंत हो गया, और उनका जीवन एक नई दिशा में मोड़ लिया।

रहस्य का खुलासा

फ्रैंक का यह रहस्य तब उजागर हुआ जब एक दिन उनके द्वारा सिल्विया को लिखे गए पत्र को कॉन्वेंट के एक शिक्षक ने देख लिया। इस पत्र से यह स्पष्ट हो गया कि सिस्टर मार्गरीटा कोई महिला नहीं, बल्कि एक पुरुष है। इस खुलासे ने फ्रैंक के जीवन को एक नई दिशा दी और उनकी असली पहचान दुनिया के सामने आ गई।

कॉन्वेंट छोड़ने की मजबूरी

फ्रैंक को 22 साल तक नन बनने के बाद 1979 में कॉन्वेंट छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा। वह सीमस्ट्रेस में प्रशिक्षित थे, और उन्हें दर्जी का काम मिल गया। यह काम उन्होंने 73 साल की उम्र तक किया। उनकी पूरी कहानी को बाद में अलग-अलग टीवी प्रोग्राम्स और किताबों में प्रदर्शित किया गया। फ्रैंक की किताबें 'द अनड्रेस्ड नन' और 'क्रॉसरोड्स इन द शैडोज' उनकी यात्रा और संघर्ष की कहानी को दर्शाती हैं।

निष्कर्ष

फ्रैंक टैवरेस की यह कहानी न केवल एक व्यक्ति के जीवन की कठिनाइयों को दर्शाती है, बल्कि यह भी बताती है कि कैसे किसी व्यक्ति को अपनी पहचान के साथ जीने के लिए साहस और आत्मविश्वास की आवश्यकता होती है। उनकी यात्रा एक प्रेरणा है, जो यह दिखाती है कि जीवन चाहे जैसा भी हो, उसे जीने का तरीका और अपनी सच्चाई को स्वीकारना सबसे महत्वपूर्ण है।