Viral Video: नोएडा के DLF मॉल में पार्किंग को लेकर विवाद, कार गायब होने से घबराईं इन्फ्लुएंसर प्राची मोगा
नोएडा के DLF मॉल ऑफ इंडिया से जुड़ा एक मामला सोशल मीडिया पर चर्चा में है। वायरल पोस्ट के मुताबिक, इन्फ्लुएंसर प्राची मोगा को उस समय परेशानी का सामना करना पड़ा, जब मॉल के बाहर खड़ी उनकी कार अचानक गायब हो गई। शुरुआत में उन्हें लगा कि उनकी कार चोरी हो गई है, लेकिन बाद में पता चला कि वाहन को टो करके बेसमेंट में ले जाया गया था।
पार्किंग की जगह नहीं मिलने पर सड़क किनारे खड़ी की कार
यह मामला DLF मॉल ऑफ इंडिया, नोएडा का है l
— Vishal M. Yadav (@VishalMYadav_) October 18, 2026
इन्फ्लुएंसर प्राची मोंगा जब DLF मॉल ऑफ इंडिया पहुंचीं, तो मॉल के अंदर की पार्किंग पूरी तरह भरी हुई थी,
वह नोएडा में नई आई थीं, उन्हें सड़क पर कोई ऐसा 'नो-पार्किंग ज़ोन' साइनबोर्ड नहीं दिखा,
वहां पहले से ही दर्जनों गाड़ियाँ खड़ी थीं,… pic.twitter.com/dM1PiRAOoS
सोशल मीडिया पर साझा की गई जानकारी के अनुसार, प्राची मोगा जब DLF मॉल ऑफ इंडिया पहुंचीं, तो वहां की इनडोर पार्किंग पूरी तरह भरी हुई थी। पोस्ट में दावा किया गया है कि वह नोएडा में नई थीं और सड़क पर उन्हें नो-पार्किंग का कोई साइनबोर्ड दिखाई नहीं दिया।
वहां पहले से कई गाड़ियां खड़ी देखकर उन्होंने एक व्यक्ति से कार पार्क करने के बारे में पूछा। आरोप है कि उस व्यक्ति ने उन्हें यह कहकर गाड़ी खड़ी करने की सलाह दी कि जब पहले से इतनी गाड़ियां खड़ी हैं, तो एक और से क्या फर्क पड़ेगा।
काम से लौटीं तो गायब मिली कार
पोस्ट के मुताबिक, अपना काम खत्म करके जब प्राची वापस लौटीं, तो उन्हें वहां अपनी कार नहीं मिली। इससे वह घबरा गईं और उन्हें वाहन चोरी होने का शक हुआ। बाद में किसी व्यक्ति ने उन्हें बताया कि कार चोरी नहीं हुई, बल्कि टो करके बेसमेंट में ले जाई गई है।
दावे के अनुसार, कार वापस लेने के लिए उनसे 2,000 रुपये मांगे गए। इसके बाद प्राची ने पार्किंग और टोइंग की व्यवस्था पर सवाल उठाए और पूछा कि इस तरह की गतिविधियां अधिकारियों की निगरानी में कैसे हो सकती हैं।
पार्किंग व्यवस्था पर उठे सवाल
इस घटना को लेकर सोशल मीडिया पर पार्किंग नियमों, नो-पार्किंग संकेतों और टोइंग प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, पोस्ट में लगाए गए आरोपों और कथित वसूली की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी जरूरी है। यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि वाहन किस नियम के तहत टो किया गया और 2,000 रुपये की मांग किस मद में की गई थी।
अगर किसी वाहन को गलत तरीके से टो किया गया हो या निर्धारित शुल्क से अधिक रकम मांगी गई हो, तो संबंधित व्यक्ति रसीद और अन्य सबूतों के साथ संबंधित अधिकारियों से शिकायत कर सकता है। फिलहाल, मामले में आधिकारिक पक्ष सामने आने पर ही पूरे घटनाक्रम की स्थिति स्पष्ट होगी।