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Viral Video: रावण दहन से लेकर राहुल गांधी तक की तुलना, ओशो के विचारों के बहाने उठाए सवाल

 

दशहरे पर देशभर में रावण दहन किया जाता है। इसे बुराई पर अच्छाई और असत्य पर सत्य की जीत का प्रतीक माना जाता है। लेकिन इसी परंपरा को लेकर सोशल मीडिया पर एक विचार सामने आया है, जिसमें सत्य और असत्य की परिभाषा तय करने वाले लोगों की भूमिका पर सवाल उठाए गए हैं।

इस विचार में कहा गया है कि समाज में किसे सही और किसे गलत माना जाएगा, यह कई बार प्रभावशाली लोगों और उनके हितों से भी प्रभावित होता है। इसी संदर्भ में ओशो के विचारों का उल्लेख करते हुए दावा किया गया है कि यदि रावण की मृत्यु नहीं हुई होती, तो संभव है कि समय के साथ उसकी छवि और उसके प्रति लोगों की धारणा अलग होती।

आज रावण का पूरे देश में दहन किया जाएगा जिसे सत्य पर असत्य की विजय के तौर पर सेलिब्रेट किया जाता है।

इस सत्य को सत्य साबित करने वाले लोग के हित तय करते हैं कौन सत्य है कौन असत्य हैं जिसे बुद्धिजीवी वर्ग कहा जाता हैं।

ओशों कहते हैं कि यादि उस दिन रावण की मौत नहीं हुई होती तो आज… pic.twitter.com/rPIuFfsUx4

— तेज़ तड़का (@tadka_tez) October 20, 2026


पोस्ट में रामायण के प्रसंग का जिक्र करते हुए विभीषण की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताया गया है। इसके बाद इस विचार को वर्तमान राजनीति से जोड़ते हुए राहुल गांधी का उदाहरण दिया गया है। टिप्पणी में कहा गया है कि एक राजनीतिक दल ने राहुल गांधी के लिए 'पप्पू' शब्द का प्रचार किया, जबकि उनकी पार्टी लंबे समय से इस छवि को चुनौती देने की कोशिश कर रही है।

इस तरह रावण दहन की परंपरा, ओशो के विचारों और मौजूदा राजनीति को जोड़कर समाज में छवि निर्माण तथा जनधारणा के प्रभाव पर सवाल उठाए गए हैं। हालांकि, ओशो के नाम से प्रस्तुत विचारों की प्रामाणिकता और राजनीतिक दावों की पुष्टि के लिए मूल स्रोतों को देखना जरूरी है।