×

Viral Video: ADM के निजी वाहन में लाल-नीली बत्ती का दावा, सड़क विवाद का वीडियो वायरल
 

 


सोशल मीडिया पर एक वीडियो को लेकर कई तरह के दावे किए जा रहे हैं. वायरल पोस्ट में एक महिला अधिकारी को ADM (अपर जिला मजिस्ट्रेट) बताते हुए सड़क पर हुए विवाद का जिक्र किया गया है. पोस्ट के मुताबिक, फ्लाईओवर से उतरने के बाद अधिकारी की कार के ड्राइवर ने अचानक ब्रेक लगा दिए, जिसके चलते पीछे आ रहे वाहनों से टक्कर हो गई.

लोगों से बहस का भी किया गया दावा

वायरल पोस्ट में आरोप लगाया गया है कि हादसे के बाद जब पीछे चल रहे वाहन सवारों ने इसका विरोध किया तो महिला अधिकारी ने कथित तौर पर अपने पद का हवाला देते हुए लोगों से बहस की. पोस्ट में यह भी दावा किया गया है कि उन्होंने वहां मौजूद लोगों के साथ कथित तौर पर अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया और चप्पल से मारने की धमकी दी.

आजकल जलवा जलाल तो सरकारी नौकरी वालों का ही हैं, अगर कोई अधिकारी के पद पर हैं तो फिर क्या ही बात हैं।

तस्वीर में दिख रही मैडम ADM के पद पर हैं, फ्लाईओवर से उतरने के बाद इनका ड्राइवर अचानक से गाड़ी रोक देता हैं,

जिससे पीछे वालों का एक्सीडेंट हो जाता हैं, जब वो इनसे पूछते हैं तो… pic.twitter.com/qwW3RJ2DKp

— Prem Bhardwaj (@premkumarcbn01) September 16, 2026


पोस्ट में आगे कहा गया है कि मीडिया के मौके पर पहुंचने के बाद महिला अधिकारी ने कथित तौर पर कार की खिड़की बंद कर ली और पर्दा गिराकर अंदर बैठ गईं. हालांकि, वायरल पोस्ट में लगाए गए इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं की गई है.

निजी कार पर लाल-नीली बत्ती को लेकर सवाल

इस पूरे मामले में सोशल मीडिया पोस्ट का सबसे ज्यादा ध्यान निजी वाहन पर लगी लाल-नीली बत्ती की ओर है. पोस्ट में सवाल उठाया गया है कि क्या किसी अधिकारी की निजी कार पर इस तरह की बत्ती लगाना नियमों के तहत अनुमति है.

हालांकि, केवल वायरल वीडियो या सोशल मीडिया पोस्ट के आधार पर यह तय नहीं किया जा सकता कि वाहन किस अधिकारी का है, घटना कहां की है या कार पर लगी बत्ती वैध अनुमति के तहत थी या नहीं. इन पहलुओं की पुष्टि संबंधित प्रशासन या पुलिस की आधिकारिक जानकारी से ही हो सकती है.

वीडियो की पुष्टि जरूरी

सोशल मीडिया पर वीडियो को ADM से जोड़कर शेयर किया जा रहा है, लेकिन पोस्ट में अधिकारी का नाम, घटना का स्थान और प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक बयान उपलब्ध नहीं कराया गया है. ऐसे में वीडियो से जुड़े दावों को तथ्य मानने से पहले आधिकारिक जांच या संबंधित विभाग की पुष्टि जरूरी है.