Viral: सर्जिकल सूई-धागे से चप्पल सिलते दिखे डॉक्टर साहब! हॉस्पिटल का वीडियो वायरल
इन दिनों सोशल मीडिया पर एक हैरान करने वाला, लेकिन काफी वायरल हो रहा वीडियो सामने आया है, जिसमें कथित रूप से एक मेडिकल स्टूडेंट को सर्जिकल उपकरणों की मदद से अपनी टूटी हुई चप्पल को जोड़ते हुए देखा जा सकता है। वीडियो देखने में तो मज़ाकिया लग सकता है, लेकिन इसकी गंभीरता कहीं ज्यादा है — क्योंकि इसमें जिस सर्जिकल सूई और धागे का इस्तेमाल किया गया है, वो असल में इंसानों के ऑपरेशन यानी टांके लगाने के लिए प्रयोग होता है।
वीडियो में क्या है?
यह वायरल वीडियो अस्पताल के एक वार्ड से फिल्माया गया लगता है। इसमें साफ देखा जा सकता है कि एक मरीज बेड पर लेटा हुआ है और उसके पैरों के पास एक स्टूल पर मेडिकल स्टूडेंट बैठा है। छात्र के कपड़े नीले रंग के हैं, जो आमतौर पर मेडिकल स्टाफ द्वारा ड्यूटी के दौरान पहने जाते हैं। छात्र पूरी एकाग्रता के साथ अपनी टूटी चप्पल को सर्जिकल सुई और टांके लगाने वाले धागे से सिल रहा है — मानो वो किसी जूते की मरम्मत नहीं बल्कि किसी छोटी सर्जरी को अंजाम दे रहा हो।
यह वीडियो हॉस्पिटल स्टाफ के किसी सदस्य द्वारा ही शूट किया गया है, और फिर इसे सोशल मीडिया पर अपलोड किया गया। देखते ही देखते यह वायरल हो गया और इंस्टाग्राम, फेसबुक और ट्विटर जैसी तमाम सोशल मीडिया साइट्स पर शेयर किया जाने लगा।
लोगों की प्रतिक्रिया
वीडियो को देखकर लोगों ने हल्के-फुल्के अंदाज में कमेंट किए। इंस्टाग्राम पर एक यूजर ने लिखा, "डॉक्टर से मोची तक का सफर," तो वहीं दूसरे यूजर ने हंसते हुए कमेंट किया, "भाई अभी प्रैक्टिस कर रहा है, पहले चप्पल, फिर ऑपरेशन।"
कई यूजर्स ने इसे मजेदार और क्रिएटिव बताया, जबकि कुछ ने इस पर सवाल भी उठाए कि क्या अस्पताल जैसे संवेदनशील वातावरण में इस तरह की लापरवाही उचित है?
मजाक से आगे की बात
विडंबना यह है कि इतने गंभीर उपकरण — जिनका इस्तेमाल सर्जरी में होता है — को इस तरह आम घरेलू कार्य में प्रयोग करना अस्पताल की व्यवस्था और संक्रमण नियंत्रण पर सवाल खड़े करता है। अगर यही सूई और धागा फिर से किसी मरीज के टांके लगाने के लिए उपयोग में लाया गया, तो इससे संक्रमण फैलने का गंभीर खतरा हो सकता है।
मेडिकल एथिक्स और हाइजीन के लिहाज से यह घटना बेहद चिंता का विषय है। अस्पतालों में हर उपकरण को डिस्पोजेबल या स्टरलाइज करने की सख्त नीति होती है, और उसका अनुचित प्रयोग स्वास्थ्य सुरक्षा को खतरे में डाल सकता है।
किस अस्पताल का है मामला?
वीडियो में जगह या अस्पताल का नाम स्पष्ट नहीं है, और न ही इस बात की पुष्टि हुई है कि यह वीडियो किस देश या राज्य से आया है। लेकिन अंदाजा लगाया जा रहा है कि यह किसी सरकारी अस्पताल या मेडिकल कॉलेज का वार्ड हो सकता है, जहां मेडिकल छात्र अपनी ड्यूटी पर थे।
स्वास्थ्य मंत्रालय या संबंधित मेडिकल संस्था की ओर से इस वीडियो पर फिलहाल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन अगर यह मामला भारत से जुड़ा हुआ निकलता है, तो जांच की संभावना जरूर बन सकती है।
सर्जिकल उपकरणों का गैर-चिकित्सकीय प्रयोग कितना खतरनाक?
सर्जिकल सुई, धागा, और अन्य उपकरण खास मेडिकल ग्रेड सामग्री से बनाए जाते हैं, जिनका एक ही उद्देश्य होता है — मानव शरीर में उपचार। इन्हें पूर्णतः स्टरलाइज कर उपयोग में लाया जाता है। अगर इन्हें बिना स्टरलाइज किए, या किसी अनधिकृत कार्य में प्रयोग किया गया, तो यह ना सिर्फ उस उपकरण को अनुपयोगी बना देता है, बल्कि यदि अनजाने में दोबारा इसका प्रयोग हो जाए, तो गंभीर संक्रमण फैला सकता है।
वायरल वीडियो में यही डर छिपा हुआ है, जिसे अब तक शायद अधिकतर दर्शकों ने नजरअंदाज किया है।
निष्कर्ष
मेडिकल स्टूडेंट्स पर भविष्य में स्वास्थ्य सेवा की जिम्मेदारी होती है, ऐसे में इस तरह का लापरवाह व्यवहार न केवल उनके प्रोफेशनल एथिक्स पर सवाल खड़े करता है, बल्कि मरीजों की सुरक्षा पर भी खतरा पैदा करता है। भले ही वीडियो देखने में मजाकिया लगे, लेकिन इसके पीछे छिपा लापरवाह रवैया बेहद चिंताजनक है।
हमें यह समझने की ज़रूरत है कि स्वास्थ्य सेवाएं मनोरंजन का विषय नहीं हैं। हर एक उपकरण, हर एक प्रक्रिया की अपनी जिम्मेदारी होती है। अगर यह वीडियो सिर्फ वायरल ट्रेंड के लिए किया गया हो, तो यह और भी खतरनाक मानसिकता को दर्शाता है।
तो अगली बार जब सोशल मीडिया पर ऐसा कोई वीडियो देखें, तो केवल हंसें नहीं — सोचें भी।