×

54 साल की मां के लिए अपर बर्थ बनी परेशानी, बेटे ने रेलवे को लिखा मेल, सोचा- कुछ नहीं होगा, फिर मिला सरप्राइज!
 

 

ट्रेन में सफर के दौरान सीट को लेकर यात्रियों को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है। खासकर जब किसी उम्रदराज यात्री को अपर बर्थ मिल जाए तो ऊपर चढ़ना और उतरना मुश्किल हो सकता है। ऐसा ही एक मामला सामने आया, जिसमें 54 साल की मां के लिए अपर बर्थ परेशानी का कारण बन गई। बेटे ने मां की समस्या को देखते हुए रेलवे को एक ईमेल कर मदद मांगी। उसे उम्मीद नहीं थी कि रेलवे की ओर से इस पर इतनी जल्दी और सकारात्मक प्रतिक्रिया मिलेगी।

बताया जा रहा है कि बेटे ने अपनी मां के साथ ट्रेन में सफर करने के लिए टिकट बुक कराया था। टिकट में उसकी मां को अपर बर्थ आवंटित हो गई। 54 साल की उम्र में ऊपर की बर्थ तक पहुंचना उनके लिए सुविधाजनक नहीं था। बेटे ने इस परेशानी को देखते हुए रेलवे से संपर्क करने का फैसला किया।

उसने रेलवे को ईमेल के जरिए पूरी स्थिति बताई और अनुरोध किया कि संभव हो तो उसकी मां को लोअर बर्थ उपलब्ध करा दी जाए। बेटे के मुताबिक, उसने ईमेल सिर्फ मदद की उम्मीद में भेजा था। उसे यह अंदाजा नहीं था कि रेलवे की तरफ से उसके संदेश पर इतनी गंभीरता से ध्यान दिया जाएगा।

इसके बाद रेलवे की ओर से मामले पर प्रतिक्रिया दी गई। उपलब्ध सीटों और परिस्थितियों के आधार पर यात्री की बर्थ को लेकर मदद करने की कोशिश की गई। रेलवे की ओर से मिली प्रतिक्रिया ने बेटे को हैरान कर दिया और उसने इस अनुभव को सोशल मीडिया पर साझा किया।

मामले के सामने आने के बाद लोग रेलवे की प्रतिक्रिया की चर्चा करने लगे। यात्रियों का कहना है कि बुजुर्गों और जरूरतमंद यात्रियों के लिए यात्रा को आसान बनाने के प्रयास काफी महत्वपूर्ण हैं। हालांकि, बर्थ बदलना उपलब्धता और रेलवे के नियमों पर निर्भर करता है। इसलिए हर यात्री के अनुरोध पर लोअर बर्थ मिलना सुनिश्चित नहीं होता।

रेलवे में टिकट बुक करते समय वरिष्ठ नागरिकों और कुछ अन्य श्रेणियों के यात्रियों के लिए लोअर बर्थ से जुड़े प्रावधान मौजूद हैं, लेकिन सीट उपलब्धता के आधार पर बर्थ आवंटित की जाती है। ट्रेन में चढ़ने के बाद भी जरूरत पड़ने पर यात्री टीटीई से अपनी समस्या बता सकते हैं। यदि कोई लोअर बर्थ उपलब्ध हो तो नियमों के तहत बदलाव की संभावना हो सकती है।

इस घटना ने यह भी दिखाया कि यात्रा के दौरान किसी वास्तविक परेशानी का सामना करने पर संबंधित विभाग से संपर्क करना उपयोगी हो सकता है। बेटे ने मां की समस्या को नजरअंदाज करने के बजाय रेलवे तक अपनी बात पहुंचाई और उसे उम्मीद से अलग प्रतिक्रिया मिली। यही वजह है कि यह मामला सोशल मीडिया पर लोगों का ध्यान खींच र