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आधी तनख्वाह किराए पर खर्च करती है गुरुग्राम की ये महिला, वजह जानकर सोच में पड़ जाएंगे!
 

 

गुरुग्राम जैसे महंगे शहर में घर का किराया लोगों के बजट का बड़ा हिस्सा खा जाता है। आमतौर पर लोग कम किराए वाले इलाकों में घर तलाशते हैं या फिर खर्च कम करने के लिए शेयरिंग में रहते हैं। लेकिन गुरुग्राम की एक महिला का मामला इन सबसे अलग है। वह अपनी आधी तनख्वाह सिर्फ घर के किराए पर खर्च करती है। इसके पीछे की वजह सामने आने के बाद मामला चर्चा में आ गया।

सैलरी का बड़ा हिस्सा सिर्फ किराए में

महिला के मुताबिक, गुरुग्राम में रहने के लिए उसे अपनी मासिक आय का करीब 50 फीसदी हिस्सा किराए पर खर्च करना पड़ता है। यानी हर महीने सैलरी का एक बड़ा हिस्सा घर की जरूरत पूरी करने में चला जाता है।

महंगे शहरों में नौकरी करने वाले युवाओं के लिए यह स्थिति अब असामान्य नहीं रह गई है। अच्छी लोकेशन पर रहने की सुविधा के बदले किराए का बोझ काफी बढ़ जाता है।

आखिर क्यों नहीं छोड़ना चाहती घर?

महिला के किराए का बड़ा हिस्सा खर्च करने की सबसे बड़ी वजह लोकेशन और सुविधा बताई जा रही है। घर उसके ऑफिस और शहर की जरूरी सुविधाओं के नजदीक है। इससे रोजाना लंबी दूरी तय करने में लगने वाला समय और आने-जाने की परेशानी कम हो जाती है।

अगर वह कम किराए वाले इलाके में घर लेती है तो उसे ऑफिस तक पहुंचने के लिए रोजाना ज्यादा समय और पैसे खर्च करने पड़ सकते हैं।

सिर्फ किराया नहीं, यात्रा का खर्च भी बचता है

महिला का तर्क है कि घर का किराया भले ही ज्यादा है, लेकिन ऑफिस के करीब रहने से रोजाना कैब, ऑटो या अन्य परिवहन पर होने वाला खर्च कम हो जाता है। इसके अलावा रोजाना लंबी यात्रा से बचने के कारण समय भी बचता है।

यानी वह ज्यादा किराए को केवल घर का खर्च नहीं मानती, बल्कि इसे समय और सुविधा की कीमत के तौर पर भी देखती है।

गुरुग्राम में बढ़ती किराए की चुनौती

गुरुग्राम में नौकरी करने वाले लोगों के लिए किराया लंबे समय से बड़ा खर्च रहा है। साइबर सिटी और प्रमुख ऑफिस हब के आसपास किराए की कीमतें ज्यादा होने के कारण कई कर्मचारी ऑफिस से दूर रहकर यात्रा करना पसंद करते हैं।

वहीं, कुछ लोग ज्यादा किराया देकर ऑफिस के नजदीक रहना चुनते हैं। इस महिला का मामला भी इसी बहस को सामने लाता है कि पैसे बचाना ज्यादा जरूरी है या रोजाना के समय और सुविधा को प्राथमिकता देना।