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ये है चमकते पत्थरों की धरती, खुदाई करते ही निकलते हैं चमकीले खनिज; कोडरमा की अनोखी कहानी

 

झारखंड का कोडरमा जिला अपनी प्राकृतिक संपदा और खास पहचान के लिए देशभर में जाना जाता है। इसे कभी ‘अभ्रक नगरी’ (माइका सिटी) के नाम से प्रसिद्धि मिली थी। यहां की जमीन के अंदर छिपे चमकदार पत्थर और खनिज जब बाहर आते हैं तो उनकी चमक देखकर लोग हैरान रह जाते हैं।

कोडरमा की धरती में मिलने वाला अभ्रक (Mica) एक ऐसा खनिज है, जो अपनी चमकदार परतों और खास गुणों के लिए जाना जाता है। पुराने समय से ही इसका इस्तेमाल बिजली, कॉस्मेटिक, पेंट और कई औद्योगिक क्षेत्रों में किया जाता रहा है।

जमीन के अंदर छिपा है चमकदार खजाना

कोडरमा और आसपास के इलाकों में जब जमीन की खुदाई की जाती है तो कई जगह चमकीले पत्थर दिखाई देते हैं। अभ्रक की पतली-पतली परतें रोशनी पड़ने पर चमक उठती हैं, जिससे ऐसा लगता है जैसे जमीन के अंदर कोई खजाना छिपा हो।

यही वजह है कि इस क्षेत्र को लंबे समय तक दुनिया के प्रमुख अभ्रक उत्पादक इलाकों में गिना जाता था।

कभी दुनिया में मशहूर था कोडरमा का अभ्रक

एक समय था जब कोडरमा से निकलने वाला अभ्रक विदेशों तक भेजा जाता था। यहां की खदानों से मिलने वाला उच्च गुणवत्ता वाला अभ्रक अंतरराष्ट्रीय बाजार में काफी मांग रखता था।

भारत के अभ्रक उद्योग में कोडरमा की भूमिका इतनी महत्वपूर्ण थी कि इसे ‘माइका कैपिटल ऑफ इंडिया’ तक कहा जाने लगा।

रोजगार से जुड़ी थी हजारों लोगों की जिंदगी

अभ्रक खनन लंबे समय तक यहां के लोगों के रोजगार का बड़ा साधन रहा। हजारों परिवार प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से इससे जुड़े थे।

हालांकि, समय के साथ खनन नियमों में बदलाव, पर्यावरण संबंधी चिंताओं और अन्य कारणों से इस उद्योग में गिरावट आई। इसके बावजूद कोडरमा की पहचान आज भी अभ्रक और चमकदार पत्थरों की धरती के रूप में कायम है।

प्राकृतिक संपदा के साथ पर्यटन की संभावनाएं

कोडरमा सिर्फ खनिज संपदा के लिए ही नहीं, बल्कि अपनी प्राकृतिक खूबसूरती के लिए भी जाना जाता है। यहां पहाड़, जंगल और प्राकृतिक स्थल पर्यटकों को आकर्षित करते हैं।

चमकदार पत्थरों और अभ्रक की वजह से कोडरमा की कहानी आज भी लोगों के लिए कौतूहल का विषय बनी हुई है। जमीन के अंदर छिपी यह चमक इस इलाके की ऐतिहासिक और प्राकृतिक विरासत को दर्शाती है।