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सफेद फॉर्च्यूनर से आकर झाड़ू लगाता है ये सफाईकर्मी! स्वैग देख पब्लिक बोली- भाई ने सिस्टम ही हिला दिया!
 

 

सोशल मीडिया पर इन दिनों एक सफेद टोयोटा फॉर्च्यूनर और हाथ में झाड़ू लिए एक शख्स का वीडियो जमकर वायरल हो रहा है। वीडियो में दिख रहा है कि एक लग्जरी SUV सड़क किनारे आकर रुकती है और उसमें से एक व्यक्ति उतरता है। पहली नजर में लोगों को लगता है कि कोई बड़ा अधिकारी या रसूखदार व्यक्ति आया है, लेकिन जब वह गाड़ी से बाहर निकलता है तो हाथ में झाड़ू देखकर हर कोई हैरान रह जाता है। दरअसल, यह शख्स कोई अधिकारी नहीं बल्कि एक सफाईकर्मी है, जो अपनी ड्यूटी करने के लिए फॉर्च्यूनर से पहुंचता है।

यह प्रेरणादायक कहानी कर्नाटक के बंटवाल इलाके की है, जहां सेसप्पा नाम के सफाई कर्मचारी इन दिनों सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बने हुए हैं। वायरल वीडियो में वह सुबह-सुबह अपनी सफेद फॉर्च्यूनर से काम की जगह पहुंचते हैं और इसके बाद बिना किसी दिखावे के सड़क पर झाड़ू लगाना शुरू कर देते हैं। उनका यही अंदाज लोगों को सबसे ज्यादा पसंद आ रहा है।

कभी 50 रुपये थी दिहाड़ी, आज फॉर्च्यूनर के मालिक

सेसप्पा की जिंदगी हमेशा से ऐसी नहीं थी। रिपोर्ट्स के मुताबिक, उन्होंने साल 1996 में नगर परिषद में सफाई कर्मचारी के तौर पर काम शुरू किया था। शुरुआती दिनों में उन्हें सिर्फ 50 रुपये रोजाना मजदूरी मिलती थी। आर्थिक हालात इतने खराब थे कि उन्हें जीवन में कई मुश्किलों का सामना करना पड़ा।

लेकिन मेहनत और हिम्मत के दम पर उन्होंने धीरे-धीरे अपनी जिंदगी बदल दी। उन्होंने नौकरी के साथ खेती, दूध बेचने और अन्य छोटे काम भी किए। बचत और मेहनत के सहारे उन्होंने पहले छोटी गाड़ियां खरीदीं और फिर आखिरकार फॉर्च्यूनर लेने का सपना पूरा किया।

लग्जरी कार, लेकिन काम के प्रति वही सम्मान

सेसप्पा की सबसे खास बात यह है कि महंगी गाड़ी होने के बावजूद उन्होंने अपने काम को कभी छोटा नहीं समझा। वह रोज की तरह सफाई का काम करते हैं और अपनी जिम्मेदारी पूरी ईमानदारी से निभाते हैं। सोशल मीडिया यूजर्स भी इसी बात की तारीफ कर रहे हैं कि इंसान की पहचान उसकी गाड़ी या पद से नहीं बल्कि उसके काम और सोच से होती है।

सोशल मीडिया पर लोगों ने की जमकर तारीफ

वीडियो वायरल होने के बाद यूजर्स ने तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं दीं। किसी ने लिखा, "भाई ने सिस्टम ही हिला दिया", तो किसी ने कहा कि यह असली सफलता है। कई लोगों ने उनकी कहानी को मेहनत, आत्मसम्मान और संघर्ष की मिसाल बताया।

लोगों का कहना है कि सेसप्पा ने यह साबित कर दिया कि कोई भी काम छोटा नहीं होता। अगर इंसान मेहनत और लगन से आगे बढ़े तो हालात बदले जा सकते हैं। उनकी कहानी आज उन लोगों के लिए प्रेरणा बन गई है, जो मुश्किल परिस्थितियों से जूझ रहे हैं।

सेसप्पा की फॉर्च्यूनर और झाड़ू वाली तस्वीर ने एक बड़ा संदेश दिया है—सम्मान काम से मिलता है, गाड़ी से नहीं।