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यह जिस “ट्रांसपेरेंट फर्श” जैसा अनुभव बताया जा रहा है, वह असल में विमान का फर्श पारदर्शी होना नहीं होता।

आधुनिक विमानन तकनीक में ऐसा प्रभाव आमतौर पर एडवांस्ड डिस्प्ले सिस्टम या ऑगमेंटेड रियलिटी (AR)-आधारित कॉकपिट विज़न से बनाया जाता है। कुछ प्रयोगात्मक या हाई-एंड कॉन्सेप्ट कॉकपिट में पायलट को नीचे की वास्तविक जमीन कैमरों और सेंसर के जरिए दिखाकर ऐसा विजुअल फीड दिया जाता है, जिससे उसे लगे कि नीचे का हिस्सा “कटा हुआ” या पारदर्शी है।

इस तरह की तकनीक का उद्देश्य पायलट की विजिबिलिटी बढ़ाना होता है, खासकर:

  • खराब मौसम या कम विज़िबिलिटी में
  • लैंडिंग और टेकऑफ के दौरान
  • ऊंचाई से नीचे के इलाके को बेहतर समझने के लिए

असल में यह दृश्य एकीकृत कैमरा सिस्टम (external cameras) और हेड-अप डिस्प्ले (HUD) या कॉकपिट स्क्रीन पर प्रोजेक्ट किया गया डिजिटल व्यू होता है, न कि विमान के फर्श का असली पारदर्शी होना।

हालांकि, इस तरह की तकनीक अभी व्यापक रूप से सभी विमानों में नहीं है और ज्यादातर इसे अवधारणा (concept) या सीमित प्रयोगात्मक सिस्टम के रूप में देखा जाता है।

यानी पायलट को “जमीन दिखना” एक हाई-टेक विज़ुअलाइज़ेशन है, न कि फिजिकल रूप से ट्रांसपेरेंट विमान का फर्श।