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फुल-टाइम नौकरी का वादा, 10 महीने तक इंटर्नशिप... फिर भी नहीं मिली पक्की जॉब, Reddit पर युवक का छलका दर्द

 

आज के समय में अच्छी नौकरी पाना जितना मुश्किल है, उससे कहीं ज्यादा चुनौतीपूर्ण है नौकरी में स्थिरता हासिल करना। इसी बीच सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Reddit पर एक युवक की पोस्ट तेजी से वायरल हो रही है। युवक ने दावा किया कि उसे फुल-टाइम नौकरी का भरोसा देकर कंपनी ने करीब 10 महीने तक इंटर्नशिप करवाई, लेकिन अब तक उसे स्थायी कर्मचारी (फुल-टाइम) नहीं बनाया गया।

10 महीने से कर रहा है इंतजार

रेडिट पर साझा की गई पोस्ट में युवक ने बताया कि जब उसने कंपनी जॉइन की थी, तब उसे कहा गया था कि कुछ महीनों की इंटर्नशिप के बाद उसकी परफॉर्मेंस के आधार पर फुल-टाइम नौकरी दे दी जाएगी। इस भरोसे के साथ उसने पूरी मेहनत और जिम्मेदारी से काम किया।

हालांकि, 10 महीने बीत जाने के बाद भी कंपनी की ओर से उसे कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिला। हर बार उसे यही कहा जाता है कि "थोड़ा और इंतजार करो" या "अभी प्रक्रिया चल रही है।"

कम सैलरी में निभा रहा जिम्मेदारी

युवक का कहना है कि वह इंटर्न होने के बावजूद लगभग वही काम कर रहा है, जो कंपनी के स्थायी कर्मचारी करते हैं। इसके बावजूद उसे इंटर्नशिप स्टाइपेंड ही मिल रहा है और न तो वेतन बढ़ा है और न ही फुल-टाइम ऑफर मिला है।

उसने लिखा कि अब वह मानसिक रूप से काफी परेशान हो चुका है और समझ नहीं पा रहा कि कंपनी का इंतजार करे या दूसरी नौकरी तलाशना शुरू कर दे।

Reddit यूजर्स ने दी सलाह

पोस्ट वायरल होने के बाद हजारों यूजर्स ने अपनी राय दी। कई लोगों ने युवक को सलाह दी कि यदि कंपनी बार-बार केवल आश्वासन दे रही है और लिखित रूप में कोई ऑफर नहीं दे रही, तो उसे तुरंत दूसरी नौकरियों के लिए आवेदन शुरू कर देना चाहिए।

कुछ यूजर्स ने कहा कि कई कंपनियां कम लागत में काम करवाने के लिए लंबे समय तक इंटर्नशिप का सहारा लेती हैं। वहीं, कुछ ने अपने साथ हुए ऐसे ही अनुभव भी साझा किए।

करियर विशेषज्ञ क्या कहते हैं?

एचआर विशेषज्ञों का मानना है कि यदि किसी कंपनी में इंटर्नशिप की अवधि लगातार बढ़ाई जा रही हो और फुल-टाइम नौकरी को लेकर स्पष्ट समयसीमा या लिखित आश्वासन न दिया जाए, तो कर्मचारियों को सतर्क रहना चाहिए। ऐसे मामलों में समानांतर रूप से नई नौकरी की तलाश जारी रखना बेहतर विकल्प माना जाता है।

सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस

युवक की पोस्ट के बाद सोशल मीडिया पर इस मुद्दे पर बहस छिड़ गई है। कई लोगों का कहना है कि युवाओं का शोषण रोकने के लिए कंपनियों को इंटर्नशिप और फुल-टाइम भर्ती की प्रक्रिया अधिक पारदर्शी बनानी चाहिए। वहीं, कुछ यूजर्स का मानना है कि करियर की शुरुआत में अनुभव जरूरी है, लेकिन अनिश्चितता और लगातार टलते वादे किसी भी कर्मचारी के आत्मविश्वास और मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर डाल सकते हैं।