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दुनिया का इकलौता देश जिसकी 3 राजधानियां हैं, तीनों का अलग-अलग है काम; इतनी कैपिटल्स बनाने की वजह जानें
 

 

दुनिया में आमतौर पर हर देश की एक राजधानी होती है, जहां से सरकार देश का प्रशासन चलाती है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि दुनिया में एक ऐसा देश भी है, जिसकी तीन राजधानियां हैं और तीनों की जिम्मेदारियां अलग-अलग हैं? इस देश का नाम दक्षिण अफ्रीका है। यहां प्रशासनिक, विधायी और न्यायिक कामकाज को अलग-अलग शहरों में बांटा गया है। यही वजह है कि दक्षिण अफ्रीका की राजधानी व्यवस्था दुनिया के दूसरे देशों से अलग मानी जाती है।

दक्षिण अफ्रीका की तीन राजधानियां प्रिटोरिया, केप टाउन और ब्लूमफ़ोन्टेन हैं। इन तीनों शहरों का अपना अलग महत्व है और देश की शासन व्यवस्था में इनकी खास भूमिका है।

प्रिटोरिया में बैठती है सरकार

प्रिटोरिया दक्षिण अफ्रीका की प्रशासनिक राजधानी है। यहां राष्ट्रपति का कार्यालय और सरकार के कई प्रमुख विभाग स्थित हैं। देश के प्रशासन से जुड़े महत्वपूर्ण कामकाज यहीं से संचालित होते हैं। विदेशी देशों के कई दूतावास भी प्रिटोरिया में मौजूद हैं। इस कारण यह शहर दक्षिण अफ्रीका की सरकारी गतिविधियों का प्रमुख केंद्र माना जाता है।

केप टाउन में बनते हैं कानून

केप टाउन दक्षिण अफ्रीका की विधायी राजधानी है। यहां देश की संसद स्थित है, जहां सांसद कानून बनाने, उन पर चर्चा करने और राष्ट्रीय मुद्दों पर बहस करने का काम करते हैं। संसद के सत्र और विधायी गतिविधियां इस शहर को देश की राजनीति में महत्वपूर्ण स्थान देती हैं।

केप टाउन अपनी प्राकृतिक सुंदरता, समुद्र तटों और पर्यटन स्थलों के लिए भी प्रसिद्ध है। हालांकि, इसकी सबसे महत्वपूर्ण संवैधानिक भूमिका देश की संसद की मेजबानी करना है।

ब्लूमफ़ोन्टेन का क्या है महत्व?

ब्लूमफ़ोन्टेन को पारंपरिक रूप से दक्षिण अफ्रीका की न्यायिक राजधानी कहा जाता है। यह देश की ऐतिहासिक न्यायिक व्यवस्था से जुड़ा शहर है। यहां दक्षिण अफ्रीका के सुप्रीम कोर्ट ऑफ अपील का मुख्यालय स्थित है, जो कई मामलों में निचली अदालतों के फैसलों के खिलाफ अपील सुनता है।

हालांकि, दक्षिण अफ्रीका की सर्वोच्च संवैधानिक अदालत जोहान्सबर्ग में स्थित है। इसलिए ब्लूमफ़ोन्टेन को देश की न्यायिक व्यवस्था का ऐतिहासिक केंद्र कहना अधिक सटीक है।

आखिर तीन राजधानियां बनाने की जरूरत क्यों पड़ी?

दक्षिण अफ्रीका में तीन राजधानियों की व्यवस्था के पीछे ऐतिहासिक और राजनीतिक कारण हैं। वर्ष 1910 में दक्षिण अफ्रीका संघ के गठन के समय विभिन्न क्षेत्रों के बीच राजनीतिक संतुलन बनाने की जरूरत थी। उस समय अलग-अलग शहरों का प्रशासनिक, विधायी और न्यायिक महत्व था।

राजधानी को लेकर किसी एक शहर को चुनने के बजाय महत्वपूर्ण संस्थानों को अलग-अलग स्थानों पर रखने का समझौता किया गया। इसका उद्देश्य अलग-अलग क्षेत्रों के हितों को प्रतिनिधित्व देना और सत्ता के प्रमुख केंद्रों के बीच संतुलन कायम करना था।

इस व्यवस्था के कारण प्रिटोरिया, केप टाउन और ब्लूमफ़ोन्टेन को अलग-अलग भूमिकाएं मिलीं। समय के साथ यह व्यवस्था दक्षिण अफ्रीका की शासन प्रणाली की एक विशिष्ट पहचान बन गई।

क्या दक्षिण अफ्रीका सच में अकेला देश है?

दक्षिण अफ्रीका को दुनिया का प्रमुख उदाहरण माना जाता है, जहां तीन शहरों में राजधानी से जुड़े अलग-अलग राष्ट्रीय कार्य किए जाते हैं। हालांकि, दुनिया के कुछ अन्य देशों में भी सरकारी संस्थान अलग-अलग शहरों में स्थित हैं। इसलिए यह कहना कि किसी भी दूसरे देश में ऐसी व्यवस्था नहीं है, पूरी तरह सही नहीं होगा।

दक्षिण अफ्रीका की खासियत यह है कि उसकी तीन पारंपरिक राजधानियों को प्रशासनिक, विधायी और न्यायिक भूमिकाओं के आधार पर पहचाना जाता है। यह व्यवस्था बताती है कि किसी देश की राजधानी केवल एक शहर तक सीमित होना जरूरी नहीं है और ऐतिहासिक समझौते किसी देश की प्रशासनिक संरचना को लंबे समय तक प्रभावित कर सकते हैं।