भानगढ़ किले की रहस्यमयी कहानी: तांत्रिक की सनक और श्राप ने उजाड़ दिया पूरा शहर! आज भी क्यों कहलाता है भूतों का गढ़?
राजस्थान का भानगढ़ किला अपनी ऐतिहासिक विरासत और खूबसूरत स्थापत्य के साथ-साथ रहस्यमयी कहानियों के लिए भी मशहूर है। अलवर जिले में स्थित इस किले से जुड़ी कई लोककथाएं आज भी लोगों के बीच प्रचलित हैं। इनमें सबसे चर्चित कहानी राजकुमारी रत्नावती और तांत्रिक सिंधु सेवड़ा से जुड़ी है। हालांकि इन कहानियों को इतिहास का प्रमाणित तथ्य नहीं, बल्कि लोककथा के रूप में देखा जाता है।
राजकुमारी रत्नावती पर मोहित था तांत्रिक
लोककथा के अनुसार भानगढ़ की राजकुमारी रत्नावती बेहद खूबसूरत थीं। उनकी सुंदरता की चर्चा दूर-दूर तक थी। इसी दौरान सिंधु सेवड़ा नाम का एक तांत्रिक राजकुमारी पर मोहित हो गया। कहानी में बताया जाता है कि उसने राजकुमारी को अपने वश में करने के लिए तंत्र-मंत्र का सहारा लेने की कोशिश की।
कहा जाता है कि तांत्रिक ने राजकुमारी के लिए भेजे जाने वाले इत्र में कथित तौर पर वशीकरण मंत्र का प्रयोग किया। लेकिन रत्नावती को उसकी चाल का पता चल गया। उन्होंने इत्र की शीशी को एक बड़े पत्थर की ओर फेंक दिया। लोककथा के मुताबिक इसके बाद पत्थर लुढ़कता हुआ तांत्रिक की ओर बढ़ा और उसकी मौत हो गई।
मरते समय दिया भानगढ़ को श्राप
कहानी के अनुसार मौत से पहले तांत्रिक ने भानगढ़ को श्राप दिया कि यह नगर जल्द ही उजड़ जाएगा और यहां दोबारा खुशहाली नहीं लौटेगी। इसके बाद भानगढ़ के उजड़ने की कहानी इस श्राप से जोड़ दी गई। कुछ लोककथाओं में यह भी दावा किया जाता है कि इसके बाद यहां रहने वाले लोगों पर विपत्तियां आईं और पूरा शहर धीरे-धीरे वीरान हो गया।
एक दूसरी कहानी भी है बेहद चर्चित
भानगढ़ से जुड़ी सिर्फ तांत्रिक वाली कहानी ही नहीं, बल्कि बाबा बालानाथ से जुड़ी एक अन्य लोककथा भी प्रसिद्ध है। भारत सरकार के पर्यटन पोर्टल पर भी भानगढ़ से जुड़ी इन दोनों प्रमुख किंवदंतियों का उल्लेख मिलता है। एक कथा में बताया जाता है कि बाबा बालानाथ की इच्छा थी कि किसी भवन की परछाई उनके स्थान पर न पड़े। बाद में निर्माण बढ़ने के कारण उनकी शर्त टूटने पर श्राप की कहानी कही जाती है।
रात में क्यों नहीं जा सकते?
भानगढ़ किले को लेकर डरावनी कहानियां इतनी लोकप्रिय हैं कि इसे भारत के सबसे रहस्यमयी स्थानों में गिना जाता है। आधिकारिक पर्यटन जानकारी के अनुसार सूर्योदय से पहले और सूर्यास्त के बाद किले में प्रवेश की अनुमति नहीं है।
कई लोग यहां रात में अजीब आवाजें और असामान्य घटनाएं महसूस करने का दावा करते हैं, लेकिन भूत-प्रेत या आत्माओं की मौजूदगी का कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इसलिए भानगढ़ की डरावनी कहानियों को इतिहास, स्थानीय लोकविश्वास और रहस्य के मिश्रण के तौर पर देखना ज्यादा उचित है।