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इलाज मांगता रहा घायल, परिजनों को वीडियो बनाना पड़ा भारी!

 

भागलपुर के सरकारी अस्पताल से सामने आया एक वीडियो स्वास्थ्य व्यवस्था और मरीजों के अधिकारों को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। वीडियो में एक घायल व्यक्ति पुलिस वाहन के अंदर दर्द से तड़पता हुआ नजर आ रहा है। आरोप है कि घायल को इलाज की सख्त जरूरत होने के बावजूद अस्पताल में मौजूद डॉक्टरों ने उसका इलाज करने से इनकार कर दिया।

जब जान बचाने Doctor वाले ही मुंह मोड़ लें, तो सच दिखाना भी गुनाह बन जाता है!

​Bhagalpur के Government Hospital में Police की गाड़ी में एक घायल व्यक्ति तड़प रहा है!

Doctor इलाज से साफ इनकार कर देते हैं।
जबकि इस समय घायल आदमी को इलाज की ज़रूरत थी!

जब बेबस परिजन इस अन्याय का… pic.twitter.com/0pwN1WJYhS

— Afjal Raj Guru (@afjalrajguru) September 8, 2026

जब जान बचाने Doctor वाले ही मुंह मोड़ लें, तो सच दिखाना भी गुनाह बन जाता है!

​Bhagalpur के Government Hospital में Police की गाड़ी में एक घायल व्यक्ति तड़प रहा है!

Doctor इलाज से साफ इनकार कर देते हैं।
जबकि इस समय घायल आदमी को इलाज की ज़रूरत थी!

जब बेबस परिजन इस अन्याय का… pic.twitter.com/0pwN1WJYhS

— Afjal Raj Guru (@afjalrajguru) September 8, 2026


घायल व्यक्ति की हालत देखकर उसके परिजन लगातार मदद की गुहार लगाते नजर आते हैं। परिवार का आरोप है कि जब उन्हें अस्पताल से जरूरी चिकित्सा सहायता नहीं मिली, तो उन्होंने पूरे घटनाक्रम का वीडियो बनाकर सच्चाई सामने लाने की कोशिश की। लेकिन आरोप है कि वीडियो रिकॉर्ड करने से उन्हें रोक दिया गया और गंभीर कार्रवाई की धमकी तक दी गई।

ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर किसी सरकारी अस्पताल में घायल मरीज को समय पर इलाज नहीं मिलता, तो उसके परिजन अपनी परेशानी और कथित लापरवाही को आखिर किस तरह सामने रखें? क्या किसी व्यवस्था पर सवाल उठाना या अपनी आंखों के सामने हो रही घटना को रिकॉर्ड करना इतना बड़ा अपराध है कि परिवार को डराया-धमकाया जाए?

सरकारी अस्पताल आम लोगों के लिए उम्मीद की जगह होते हैं। गरीब और जरूरतमंद परिवार अक्सर इन्हीं अस्पतालों के भरोसे अपने मरीज को लेकर पहुंचते हैं। ऐसे में अगर इलाज के बजाय उन्हें निराशा, परेशानी या कथित तौर पर धमकियों का सामना करना पड़े, तो यह पूरी व्यवस्था पर सवाल खड़ा करता है।

हालांकि, वीडियो में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है और पूरे मामले में अस्पताल प्रशासन तथा संबंधित अधिकारियों का पक्ष भी सामने आना चाहिए। लेकिन अगर घायल व्यक्ति को वास्तव में समय पर इलाज नहीं मिला और शिकायत करने या घटना रिकॉर्ड करने पर परिवार को धमकाया गया, तो यह बेहद गंभीर मामला है।

सवाल यह है कि मरीज की जान से ज्यादा जरूरी आखिर क्या हो सकता है?
क्या अस्पताल में इलाज मांगना किसी का अधिकार नहीं है?
और अगर किसी के साथ गलत हो रहा हो, तो उसकी आवाज दुनिया तक पहुंचाना अपराध क्यों माना जाए?

अब जरूरत है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो और अगर लापरवाही या दबाव बनाने के आरोप सही पाए जाते हैं, तो जिम्मेदार लोगों पर उचित कार्रवाई की जाए।