ढूंढाड़ राजवंश की आराध्य देवी शिला माता की महिमा अनोखी, दरबार पर लगता है श्रद्धालुओं का रैला, सवाई मानसिंह की रही गहरी आस्था
राजस्थान की धरती पर कई प्रसिद्ध मंदिरों और देवी-देवताओं की पूजा होती है, लेकिन शिला माता मंदिर की महिमा अनोखी है। यह मंदिर न केवल ढूंढाड़ राजवंश की आराध्य देवी की पूजा का स्थल है, बल्कि यह अपनी आस्था और श्रद्धा के कारण भक्तों के दिलों में एक विशेष स्थान रखता है। इस मंदिर का ऐतिहासिक महत्व और सवाई मानसिंह जैसे महान शासक की उसमें गहरी आस्था ने इसे और भी महत्वपूर्ण बना दिया है।
शिला माता की महिमा
शिला माता मंदिर राजस्थान के आमेर में स्थित है और यह ढूंढाड़ राजवंश की आराध्य देवी मानी जाती है। देवी की मूर्ति को जागृत देवी के रूप में पूजा जाता है, जो भक्तों की मनोकामनाओं को पूरा करने वाली मानी जाती है। शिला माता के बारे में यह मान्यता है कि अगर श्रद्धालु सच्चे मन से उनकी पूजा करते हैं, तो देवी उनकी हर इच्छा पूरी करती हैं। यह मंदिर एक पवित्र स्थल बन चुका है, जहां दिन-प्रतिदिन श्रद्धालुओं की भारी भीड़ लगती है, विशेष रूप से नवरात्रि और अन्य धार्मिक अवसरों पर।
सवाई मानसिंह की आस्था
राजस्थान के प्रसिद्ध शासक सवाई मानसिंह की शिला माता के प्रति गहरी आस्था थी। उनका यह विश्वास था कि देवी शिला माता ही उनके राज्य की समृद्धि और शक्ति का स्रोत थीं। सवाई मानसिंह ने अपने शासनकाल में इस मंदिर को और विकसित किया था और यहां पूजा-अर्चना का विशेष महत्व दिया था। उनके शासन में इस मंदिर में कई धार्मिक आयोजन और उत्सव भी होते थे, जिसमें राजा स्वयं देवी की पूजा करते थे। उनकी आस्था और शिला माता के प्रति श्रद्धा ने इस मंदिर को और भी प्रसिद्ध बना दिया।
मंदिर का ऐतिहासिक महत्व
शिला माता का मंदिर ढूंढाड़ राजवंश की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान से जुड़ा हुआ है। राजा और रानियों की आस्थाएं इस मंदिर से जुड़ी थीं, जिससे इस स्थान की धार्मिक और ऐतिहासिक महत्वता बढ़ी। मंदिर में पूजा करने के लिए पूरे राज्य से श्रद्धालु आते थे, और उनके समर्पण और भक्ति का प्रदर्शन मंदिर के प्रांगण में देखने को मिलता था। इस मंदिर में विशेष पूजा विधियाँ और तंत्र-मंत्र का भी पालन किया जाता है, जो शिला माता की शक्ति और आशीर्वाद को प्राप्त करने के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती हैं।
श्रद्धालुओं का रैला और धार्मिक उत्सव
आज भी शिला माता मंदिर में श्रद्धालुओं का रैला लगातार बढ़ता जा रहा है। न केवल राजस्थान, बल्कि भारत के विभिन्न हिस्सों से लोग इस मंदिर में आकर पूजा अर्चना करते हैं। विशेष रूप से नवरात्रि, काली चौदस और अन्य धार्मिक अवसरों पर यहाँ भारी संख्या में लोग आते हैं। यह समय मंदिर में उत्सवों का माहौल होता है, जहाँ भक्त श्रद्धा से देवी के दर्शन करने आते हैं और आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।
निष्कर्ष
शिला माता का मंदिर न केवल एक धार्मिक स्थल है, बल्कि यह राजस्थान की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहर का प्रतीक भी है। ढूंढाड़ राजवंश और सवाई मानसिंह की आस्था ने इसे एक पवित्र और महत्वपूर्ण स्थान बना दिया है। शिला माता के दर्शन से न केवल भक्तों को आध्यात्मिक सुख मिलता है, बल्कि यह उनका जीवन समृद्ध और खुशहाल बनाने की दिशा में भी मदद करता है।
इस मंदिर की महिमा और श्रद्धालुओं का रैला इसका प्रमाण है कि शिला माता की उपासना आज भी जीवित है और लोगों के जीवन में सकारात्मक प्रभाव डाल रही है।