×

प्रसिद्धि के पीछे छिपी अंधभक्ति? टाइगर श्रॉफ के पैर छूने पर उठे सवाल
 

 

अपने पसंदीदा अभिनेता से मिलना, उनके साथ तस्वीर खिंचवाना और उनसे मिलने की खुशी जाहिर करना प्रशंसकों के लिए किसी खास पल से कम नहीं होता। कलाकारों के प्रति प्रशंसकों का प्रेम और उत्साह स्वाभाविक है। लेकिन जब यही प्रेम किसी अभिनेता के पैर छूने तक पहुंच जाए, तो यह सोचने पर मजबूर करता है कि आखिर किसी कलाकार को इतना सम्मान देने का आधार क्या है?

हाल ही में कुछ प्रशंसक अभिनेता टाइगर श्रॉफ से मिलने पहुंचे। उन्होंने उनके साथ तस्वीरें खिंचवाईं और उनसे मिलने के लिए आभार भी व्यक्त किया। यह सब बिल्कुल सामान्य था। लेकिन कुछ प्रशंसकों द्वारा उनके पैर छूना थोड़ा अजीब लगा।

यहां सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर टाइगर श्रॉफ ने ऐसा कौन-सा असाधारण काम किया है, जिसके लिए उनके पैर छूना जरूरी समझा जाए?

Fans came to meet Tiger Shroff, and some photos were taken; the fans even thanked him. That part was fine, but I found the act of touching his feet very strange.
What monumental achievement has he accomplished in life to warrant such respect?
He hasn't delivered a single decent… pic.twitter.com/ugenuFCvYg

— पहाड़ी गर्ल 🏔️🏔️ (@Pahadi_Anjana) September 3, 2026

Fans came to meet Tiger Shroff, and some photos were taken; the fans even thanked him. That part was fine, but I found the act of touching his feet very strange.
What monumental achievement has he accomplished in life to warrant such respect?
He hasn't delivered a single decent… pic.twitter.com/ugenuFCvYg

— पहाड़ी गर्ल 🏔️🏔️ (@Pahadi_Anjana) September 3, 2026


किसी अभिनेता को पसंद करना गलत नहीं है। उसकी फिल्मों को देखना, उसके अभिनय की प्रशंसा करना और उसके साथ तस्वीर खिंचवाने की इच्छा रखना भी पूरी तरह सामान्य है। लेकिन किसी कलाकार को इस हद तक सम्मान देना कि उसके पैर छुए जाएं, निश्चित रूप से विचार करने वाली बात है।

टाइगर श्रॉफ ने फिल्म जगत में अपनी पहचान बनाई है। वह अपने अभिनय के साथ-साथ अपने नृत्य, शारीरिक क्षमता और मारधाड़ वाले दृश्यों के लिए भी जाने जाते हैं। उनके प्रशंसकों की संख्या भी काफी बड़ी है। हालांकि, उनके अभिनय और फिल्मों को लेकर दर्शकों की राय अलग-अलग रही है। कई लोगों का मानना है कि उन्हें अभी तक ऐसी फिल्म या भूमिका नहीं मिली, जिसे उनके जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि कहा जा सके।

इसके बावजूद उनके प्रति इस तरह की श्रद्धा देखकर सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या आज प्रसिद्धि ही सम्मान का सबसे बड़ा आधार बन गई है?

आजकल किसी अभिनेता की लोकप्रियता केवल उसकी फिल्मों से तय नहीं होती। सामाजिक माध्यमों पर तस्वीरें, आकर्षक व्यक्तित्व, शानदार शारीरिक बनावट और चर्चित वीडियो भी किसी व्यक्ति को रातोंरात बहुत लोकप्रिय बना सकते हैं। विशेष रूप से युवा वर्ग कई बार प्रसिद्ध लोगों को अपना आदर्श मान लेता है, लेकिन किसी को आदर्श मानने से पहले यह देखना भी जरूरी है कि उसके जीवन की वास्तविक उपलब्धियां क्या हैं।

प्रशंसकों को अपने पसंदीदा कलाकारों से प्रेम करने का पूरा अधिकार है। लेकिन प्रेम और अंधभक्ति के बीच एक महीन अंतर होता है। किसी कलाकार की लोकप्रियता का सम्मान किया जा सकता है, लेकिन उसे ऐसी ऊंचाई पर पहुंचा देना जहां उसके सामने सिर झुकाना या पैर छूना आवश्यक समझा जाए, इस पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

आखिरकार अभिनेता भी समाज के अन्य लोगों की तरह एक इंसान ही हैं। उन्हें उनकी प्रतिभा और उपलब्धियों के लिए सम्मान मिलना चाहिए, लेकिन केवल प्रसिद्ध होने के कारण उन्हें पूजनीय बना देना शायद सही दिशा नहीं है।

प्रश्न यही है—हम आज वास्तव में उपलब्धियों का सम्मान कर रहे हैं या केवल प्रसिद्धि का?