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भारत में बैठी मां के ‘करीब’ 24 घंटे रहता है US में नौकरी कर रहा बेटा, बोला- दूर रहना मुश्किल था

 

अमेरिका में नौकरी करने वाले एक भारतीय युवक ने अपनी मां से दूर रहने की समस्या का ऐसा समाधान निकाला, जिसने सोशल मीडिया पर लोगों का ध्यान खींच लिया। नौकरी के सिलसिले में विदेश में रहने के बावजूद युवक ने अपनी मां के साथ ज्यादा से ज्यादा समय बिताने का तरीका खोज लिया। उसका कहना है कि मां से दूर रहना उसके लिए काफी मुश्किल था, इसलिए उसने ऐसा इंतजाम किया कि वह लगभग 24 घंटे उनके करीब रह सके।

मां से दूर रहना लगा मुश्किल

बेहतर करियर और नौकरी के लिए बड़ी संख्या में भारतीय युवा अमेरिका समेत दूसरे देशों का रुख करते हैं। हालांकि विदेश में रहने के दौरान परिवार से दूरी कई लोगों के लिए भावनात्मक चुनौती बन जाती है। इस युवक के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ। अमेरिका में नौकरी मिलने के बाद वह अपनी मां से हजारों किलोमीटर दूर हो गया, लेकिन वह इस दूरी को लंबे समय तक स्वीकार नहीं कर पाया।

युवक ने बताया कि मां के साथ रहना उसके लिए बेहद जरूरी था। इसी वजह से उसने अपनी जिंदगी और काम करने के तरीके में ऐसा बदलाव किया, जिससे नौकरी भी जारी रहे और मां से दूरी भी कम हो जाए।

अमेरिका में नौकरी, मां भारत में

सबसे खास बात यह है कि युवक की नौकरी अमेरिका में है, जबकि उसकी मां भारत में रहती हैं। ऐसे में दोनों देशों के बीच लंबी दूरी होने के बावजूद युवक ने मां के साथ जुड़े रहने का रास्ता निकाला। वह नियमित रूप से उनके संपर्क में रहता है और अपने दिन का बड़ा हिस्सा उनसे बात करते हुए बिताता है।

युवक की कहानी उन भारतीय परिवारों से जुड़ी है, जिनमें बच्चे नौकरी या पढ़ाई के लिए विदेश चले जाते हैं और माता-पिता भारत में रह जाते हैं। आर्थिक और करियर के अवसर बढ़ने के साथ यह दूरी आम हो गई है, लेकिन भावनात्मक रूप से इसे स्वीकार करना हर किसी के लिए आसान नहीं होता।

सोशल मीडिया पर लोगों ने किया पसंद

युवक की कहानी सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर भी लोगों ने इस पर प्रतिक्रिया दी। कई लोगों ने कहा कि विदेश में रहने के बावजूद परिवार के साथ जुड़े रहने की कोशिश आज के दौर में बेहद महत्वपूर्ण है। कुछ यूजर्स ने इसे मां-बेटे के रिश्ते की मजबूती से जोड़कर देखा।

इस कहानी का सबसे भावुक पहलू युवक का यह कहना है कि उसके लिए मां से दूर रहना मुश्किल था। करियर के लिए विदेश जाना एक फैसला हो सकता है, लेकिन परिवार से दूरी की कमी को महसूस करना भी उतना ही स्वाभाविक है। युवक ने अपने तरीके से दोनों चीजों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश की है।

यह कहानी दिखाती है कि हजारों किलोमीटर की भौगोलिक दूरी के बावजूद तकनीक और इच्छाशक्ति के जरिए परिवार से भावनात्मक जुड़ाव बनाए रखा जा सकता है।