×

शिला माता आमेर मंदिर: 400 साल पुराना आस्था का प्रतीक, जहां शीश नवाने से पूरी होती हैं सारी मन्नतें

 

राजस्थान की ऐतिहासिक राजधानी जयपुर से कुछ किलोमीटर दूर स्थित आमेर किला अपने भव्य स्थापत्य और गौरवशाली इतिहास के लिए प्रसिद्ध है। लेकिन इस किले की तलहटी में स्थित शिला माता मंदिर धार्मिक आस्था और चमत्कारी मान्यताओं के लिए जाना जाता है। यह मंदिर करीब 400 साल पुराना है और माना जाता है कि यहां शीश नवाने मात्र से भक्तों की मुरादें पूरी हो जाती हैं।

मंदिर का ऐतिहासिक महत्व

शिला माता मंदिर का निर्माण आमेर के राजा मान सिंह प्रथम ने 16वीं शताब्दी के अंतिम वर्षों में करवाया था। यह वही राजा थे जो मुग़ल सम्राट अकबर के नवरत्नों में से एक थे। कहा जाता है कि राजा मान सिंह को बंगाल में युद्ध के दौरान हार का सामना करना पड़ा था। युद्ध में सफलता पाने और देवी का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए वे कोहिमा (वर्तमान बांग्लादेश) गए और वहां से शिला (पत्थर) रूप में देवी को आमेर लाए। उसी शिला पर देवी की प्रतिमा प्रकट हुई और उसी स्थान पर भव्य मंदिर की स्थापना हुई। इसीलिए इस देवी को "शिला माता" कहा गया। यह मंदिर देवी काली के रूप में प्रतिष्ठित है और तांत्रिक शक्तियों का भी केंद्र माना जाता है।

मंदिर की स्थापत्य कला

शिला माता मंदिर की वास्तुकला भी इसकी लोकप्रियता का एक बड़ा कारण है। यह मंदिर राजपूताना और मुग़ल शैली के संगम को दर्शाता है। मुख्य द्वार पर चांदी की शानदार कारीगरी है, जहां देवी की कहानियां उकेरी गई हैं। गर्भगृह में विराजमान माता की प्रतिमा बहुत ही आकर्षक और दिव्य है। श्रद्धालु घंटों वहां बैठकर ध्यान लगाते हैं और मानसिक शांति का अनुभव करते हैं।

मन्नतें होती हैं पूरी

माना जाता है कि शिला माता के दरबार में सच्चे मन से की गई हर प्रार्थना सुनी जाती है। यहां नवविवाहित जोड़े, व्यापारी, छात्र और आम लोग अपने-अपने उद्देश्य लेकर आते हैं। कई भक्त मन्नत पूरी होने पर माता को लाल चुनरी, नारियल, और चांदी की छत्र चढ़ाते हैं।

नवरात्रों के दौरान यहां विशेष मेले और पूजन अनुष्ठान होते हैं। हजारों की संख्या में श्रद्धालु मंदिर में दर्शन के लिए उमड़ते हैं।

तांत्रिक साधना का केंद्र

इतिहासकारों के अनुसार यह मंदिर कभी शक्तिपीठ के रूप में जाना जाता था और यहां गुप्त तांत्रिक साधनाएं होती थीं। आज भी कुछ साधक यहां विशेष तांत्रिक अनुष्ठानों के लिए आते हैं, विशेषकर नवरात्रि में।

पर्यटन और श्रद्धा का संगम

जयपुर घूमने आने वाले लाखों पर्यटकों के लिए आमेर किला और शिला माता मंदिर एक अनिवार्य पड़ाव है। यहां आकर व्यक्ति न केवल इतिहास को महसूस करता है, बल्कि ईश्वर की शक्ति और भक्ति की ऊर्जा भी अनुभव करता है।

निष्कर्ष

शिला माता आमेर मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि यह आस्था, संस्कृति और इतिहास का अद्भुत संगम है। यह मंदिर हमें यह भी सिखाता है कि सच्ची श्रद्धा और निष्ठा से मांगा गया हर वरदान देवी जरूर पूरा करती हैं। अगर आप जयपुर जाएं, तो इस चमत्कारी मंदिर में शीश नवाना न भूलें – हो सकता है आपकी मन्नत भी उसी दिन पूरी हो जाए।