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दुल्हन बनने की उम्र नहीं थी, लेकिन 11 साल में कर दी शादी! 13 की उम्र में बनी मां

 

सोचिए, जिस उम्र में किसी बच्ची के हाथ में स्कूल की किताबें होनी चाहिए, उस उम्र में अगर उसके हाथों में शादी की जिम्मेदारी थमा दी जाए तो क्या होगा?बांग्लादेश से सामने आई एक रिपोर्ट में अनामिका अख्तर नाम की महिला की कहानी ने बाल विवाह की गंभीर समस्या पर फिर सवाल खड़े कर दिए हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अनामिका की शादी महज 11 साल की उम्र में 22 साल के एक व्यक्ति से कर दी गई थी। इसके करीब दो साल बाद, सिर्फ 13 साल की उम्र में वह मां बन गईं।यानी जिस उम्र में एक बच्ची को अपनी पढ़ाई, दोस्तों और भविष्य के सपनों के बारे में सोचना चाहिए, उसी उम्र में उसके सामने शादी और मातृत्व की जिम्मेदारी आ गई।

SHOCKING: शादी सिर्फ 11 साल की उम्र में, और 13 की उम्र में मां! 💔

रिपोर्ट्स के मुताबिक, बांग्लादेश की अनामिका अख्तर की शादी महज 11 साल की उम्र में 22 वर्षीय व्यक्ति से कर दी गई थी। 13 साल की उम्र में वह एक बच्चे की मां बन गईं।

यानी एक बच्ची से उसका बचपन छीनकर उसे दूसरे बच्चे… pic.twitter.com/sQjr1LymMJ

— Reporrt (@reporrtofficial) September 18, 2026

SHOCKING: शादी सिर्फ 11 साल की उम्र में, और 13 की उम्र में मां! 💔

रिपोर्ट्स के मुताबिक, बांग्लादेश की अनामिका अख्तर की शादी महज 11 साल की उम्र में 22 वर्षीय व्यक्ति से कर दी गई थी। 13 साल की उम्र में वह एक बच्चे की मां बन गईं।

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बांग्लादेश में आज भी बाल विवाह बड़ी समस्या

यह मामला सिर्फ एक लड़की की कहानी तक सीमित नहीं है। UNICEF के 2025 के आंकड़े बताते हैं कि बांग्लादेश में बाल विवाह अब भी गंभीर समस्या बना हुआ है।20 से 24 साल की महिलाओं में करीब 47.2 प्रतिशत की शादी 18 साल की उम्र से पहले हो गई थी। वहीं करीब 13.4 प्रतिशत की शादी 15 साल की उम्र से पहले हुई।UNICEF के मुताबिक, बांग्लादेश में बाल विवाह के खिलाफ कानून होने के बावजूद यह प्रथा अभी भी व्यापक है। गरीबी, शिक्षा तक सीमित पहुंच, सामाजिक दबाव और पुरानी सामाजिक मान्यताएं इसके पीछे महत्वपूर्ण कारणों में शामिल हैं।

कानून होने के बावजूद क्यों नहीं रुक रहा बाल विवाह?

सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर बाल विवाह रोकने के लिए कानून मौजूद है, तो फिर इतनी कम उम्र में लड़कियों की शादी कैसे हो रही है?UNICEF के अनुसार केवल कानून बनाना ही काफी नहीं है। बाल विवाह रोकने के लिए परिवारों की आर्थिक स्थिति सुधारना, लड़कियों की शिक्षा जारी रखना, सामाजिक सोच में बदलाव लाना और बाल संरक्षण व्यवस्था को मजबूत करना भी जरूरी है।कई मामलों में परिवार सामाजिक दबाव, गरीबी या सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं के कारण कम उम्र में लड़कियों की शादी कर देते हैं।

कम उम्र में शादी का असर कितना गंभीर है?

बाल विवाह का असर सिर्फ बचपन छिन जाने तक सीमित नहीं रहता। कम उम्र में शादी के कारण लड़कियों की पढ़ाई रुक सकती है और उनके सामने कम उम्र में गर्भावस्था और मातृत्व जैसी जिम्मेदारियां आ सकती हैं।UNICEF के मुताबिक बाल विवाह और शुरुआती गर्भावस्था का लड़कियों के स्वास्थ्य, शिक्षा और भविष्य के अवसरों पर लंबे समय तक असर पड़ सकता है।

बचपन पढ़ाई और सपनों के लिए है

11 साल की उम्र में किसी बच्ची से शादी और 13 साल की उम्र में मां बनने की कहानी सुनना यह सोचने पर मजबूर करता है कि बच्चों को उनके बचपन और भविष्य का अधिकार आखिर कब मिलेगा?बाल विवाह सिर्फ एक सामाजिक परंपरा का मामला नहीं है, बल्कि यह बच्चों की शिक्षा, सुरक्षा, स्वास्थ्य और भविष्य से जुड़ा गंभीर मुद्दा है।