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धार्मिक आस्था या महिलाओं की आजादी? गरबा को लेकर  वायरल बयान ने छेड़ी नई बहस

 

गरबा, जिसे मां दुर्गा की आराधना और भक्ति से जोड़कर देखा जाता है, एक बार फिर विवादित बयान को लेकर चर्चा में है। सोशल मीडिया पर सामने आए एक बयान में ग्रहण के दौरान यौन संबंधों को धार्मिक मान्यताओं के विरुद्ध बताया गया है। इसके बाद गरबा आयोजकों और महिलाओं के पहनावे को लेकर बेहद आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया गया।

हमारे ग्रन्थों में ग्रहण के समय संभोग वर्जित बताया गया है।

लेकिन कुछ लोग बाज नहीं आते ग्रहण वाली रात को कामक्रीड़ा करते हैं और फिर औलादों के रूप में ऐसे पाप पिंड निकलते हैं....।
आयोजकों अगर तुम परम पवित्र गरबा नृत्य में ऐसी बिगड़ैल औरतों को अश्लीलता परोसने के लिए मंच दे रहे हो… pic.twitter.com/IJm70X03W1

— Nikky Choudhary (@saharawatnikky0) October 17, 2026

हमारे ग्रन्थों में ग्रहण के समय संभोग वर्जित बताया गया है।

लेकिन कुछ लोग बाज नहीं आते ग्रहण वाली रात को कामक्रीड़ा करते हैं और फिर औलादों के रूप में ऐसे पाप पिंड निकलते हैं....।
आयोजकों अगर तुम परम पवित्र गरबा नृत्य में ऐसी बिगड़ैल औरतों को अश्लीलता परोसने के लिए मंच दे रहे हो… pic.twitter.com/IJm70X03W1

— Nikky Choudhary (@saharawatnikky0) October 17, 2026


बयान में आरोप लगाया गया कि कुछ गरबा आयोजक धार्मिक आयोजन के मंच पर अश्लीलता को बढ़ावा दे रहे हैं। साथ ही, महिलाओं के चरित्र और उनके परिवारों को लेकर भी अपमानजनक टिप्पणियां की गईं। बयान में गरबा पंडालों में युवाओं की बढ़ती दिलचस्पी पर भी सवाल उठाए गए।

इस तरह की टिप्पणियों ने धार्मिक परंपराओं, सार्वजनिक आयोजनों में मर्यादा और महिलाओं के सम्मान को लेकर बहस छेड़ दी है। जहां कुछ लोग धार्मिक आयोजनों की गरिमा बनाए रखने की बात करते हैं, वहीं महिलाओं को अपमानित करने वाली भाषा पर भी गंभीर सवाल उठते हैं।

धार्मिक आस्था और परंपराओं पर चर्चा करना अलग बात है, लेकिन किसी महिला के कपड़ों या निजी जीवन के आधार पर उसके चरित्र पर हमला करना विवाद को और बढ़ा सकता है। गरबा जैसे सांस्कृतिक आयोजन में भक्ति, उत्सव और सम्मान—तीनों के बीच संतुलन बनाए रखना जरूरी है।