☰
×

मुंबई छोड़कर उत्तराखंड के पहाड़ों में परिवार के साथ बस गया पायलट, बताया हर महीने का खर्चा

 

मुंबई जैसे बड़े शहर में पायलट की नौकरी, अच्छी कमाई और आधुनिक सुविधाओं वाली जिंदगी छोड़कर पहाड़ों में बसना सुनने में भले ही हैरान करने वाला लगे, लेकिन एक परिवार ने ऐसा ही फैसला लिया है। मुंबई की भागदौड़ भरी जिंदगी से दूर यह पायलट अब अपने परिवार के साथ उत्तराखंड के पहाड़ों में रह रहा है। उसने अपनी नई जिंदगी के बारे में बताते हुए यह भी बताया कि पहाड़ों में हर महीने उसका खर्च कितना आता है।

पायलट के मुताबिक, मुंबई में उसकी जिंदगी काफी व्यस्त थी। नौकरी के कारण लगातार यात्रा, शहर का ट्रैफिक, महंगा किराया और रोजमर्रा की भागदौड़ का असर परिवार की जिंदगी पर भी पड़ रहा था। आर्थिक रूप से सुविधाएं होने के बावजूद उन्हें लगने लगा कि उनके पास परिवार के साथ बिताने के लिए पर्याप्त समय नहीं है।

इसी सोच के बाद परिवार ने शहर से दूर जाने का फैसला किया। उत्तराखंड के पहाड़ी इलाके में रहने के लिए जगह तलाशने के बाद उन्होंने वहां बसने का निर्णय लिया। अब उनका परिवार पहाड़ों के शांत वातावरण, हरियाली और प्रकृति के बीच अपनी जिंदगी बिता रहा है।

पायलट का कहना है कि पहाड़ों में रहने के बाद सबसे बड़ा बदलाव उनकी जीवनशैली में आया है। सुबह का माहौल शांत रहता है और घर से बाहर निकलते ही पहाड़, जंगल और खुला आसमान नजर आता है। शहर में जहां हर काम के लिए वाहन और बाजार पर निर्भर रहना पड़ता था, वहीं अब परिवार की कई जरूरतें सीमित हो गई हैं।

उन्होंने अपने मासिक खर्च का भी जिक्र किया। उनके मुताबिक, पहाड़ों में रहने पर किराया या घर से जुड़े खर्च, राशन, बिजली, इंटरनेट, यात्रा और अन्य जरूरी चीजों को मिलाकर कुल मासिक खर्च मुंबई की तुलना में काफी कम हो सकता है। हालांकि, खर्च पूरी तरह इस बात पर निर्भर करता है कि परिवार किस इलाके में रहता है और उसकी जीवनशैली कैसी है।

पायलट ने बताया कि पहाड़ों में रहने का मतलब यह नहीं है कि हर चीज सस्ती हो जाती है। कई सामान शहरों से मंगवाने पड़ते हैं और दूरदराज के इलाकों में आने-जाने का खर्च भी बढ़ सकता है। इसके बावजूद रोजमर्रा की जिंदगी में अनावश्यक खर्च कम हो गया है।

परिवार के लिए सबसे बड़ा फायदा समय और सुकून बताया जा रहा है। मुंबई में काम और ट्रैफिक के बीच जो समय निकल जाता था, अब उसका बड़ा हिस्सा परिवार के साथ बीतता है। बच्चों को भी प्रकृति के करीब रहने और पहाड़ी वातावरण में बड़ा होने का अवसर मिल रहा है।

हालांकि, पहाड़ों में जीवन की अपनी चुनौतियां हैं। स्वास्थ्य सुविधाओं, स्कूल, बाजार और दूसरी जरूरी सेवाओं तक पहुंच कई जगहों पर आसान नहीं होती। मौसम खराब होने पर सड़कें प्रभावित हो सकती हैं और इंटरनेट या बिजली जैसी सुविधाओं में भी कभी-कभी परेशानी आ सकती है।

इसके बावजूद पायलट का मानना है कि हर व्यक्ति के लिए सफलता का मतलब अलग होता है। उनके लिए अब सिर्फ बड़ी सैलरी और शहर की सुविधाएं महत्वपूर्ण नहीं हैं। परिवार के साथ समय, शांत वातावरण और बेहतर जीवनशैली भी उतनी ही जरूरी है।

मुंबई की तेज रफ्तार जिंदगी से उत्तराखंड के पहाड़ों तक का यह सफर उनके लिए सिर्फ जगह बदलने का फैसला नहीं है। यह जीवन को अपनी प्राथमिकताओं के हिसाब से दोबारा व्यवस्थित करने की कोशिश है। उनका अनुभव उन लोगों के लिए भी दिलचस्प है, जो नौकरी और शहर की सुविधाओं के बीच सुकून भरी जिंदगी की तलाश कर रहे हैं।