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प्लास्टिक की स्ट्रॉ से ज्यादा खतरनाक निकला कागज वाला, नई स्टडी में खुलासा, केमिकल्स से भर देता है मुंह!

 

प्लास्टिक के इस्तेमाल को कम करने के लिए पिछले कुछ वर्षों में पेपर स्ट्रॉ को पर्यावरण के अनुकूल विकल्प के तौर पर खूब बढ़ावा दिया गया है। कई जगहों पर प्लास्टिक स्ट्रॉ की जगह कागज से बनी स्ट्रॉ का इस्तेमाल भी शुरू हो चुका है। लेकिन अब एक स्टडी ने पेपर स्ट्रॉ को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। रिसर्च में दावा किया गया है कि पेपर और कुछ अन्य वैकल्पिक स्ट्रॉ में ऐसे रसायन पाए जा सकते हैं, जो पेय पदार्थ के साथ शरीर में पहुंचने की आशंका पैदा करते हैं।

दरअसल, पेपर स्ट्रॉ को टिकाऊ और पर्यावरण के लिए बेहतर विकल्प माना जाता है, लेकिन कागज को लंबे समय तक पानी या किसी तरल पदार्थ में टिकाए रखना आसान नहीं होता। इसलिए कई पेपर स्ट्रॉ को मजबूत और पानी से बचाने के लिए उनकी सतह पर अलग-अलग तरह की कोटिंग की जाती है। इसी कोटिंग और उसमें इस्तेमाल होने वाले रसायनों को लेकर वैज्ञानिकों ने चिंता जताई है।

एक चर्चित अध्ययन में शोधकर्ताओं ने अलग-अलग प्रकार की स्ट्रॉ का परीक्षण किया। इसमें पेपर, प्लास्टिक और अन्य सामग्री से बनी स्ट्रॉ को शामिल किया गया था। शोधकर्ताओं ने इनमें तथाकथित PFAS यानी Per- and Polyfluoroalkyl Substances की मौजूदगी की जांच की। PFAS रसायनों के एक बड़े समूह को कहा जाता है, जिनका इस्तेमाल उनकी पानी और तेल प्रतिरोधी खूबियों के कारण विभिन्न उत्पादों में किया जाता रहा है।

स्टडी में कुछ पेपर स्ट्रॉ में PFAS की मौजूदगी के संकेत मिले। इसका मतलब यह नहीं है कि हर पेपर स्ट्रॉ में खतरनाक मात्रा में PFAS मौजूद होता है या हर बार स्ट्रॉ के इस्तेमाल से व्यक्ति को नुकसान होगा। शोधकर्ताओं ने यह भी बताया कि इन रसायनों की मौजूदगी और वास्तविक स्वास्थ्य जोखिम के बीच अंतर समझना जरूरी है।

PFAS को लेकर वैज्ञानिक समुदाय में लंबे समय से चिंता रही है, क्योंकि इनमें से कुछ रसायन पर्यावरण में लंबे समय तक बने रह सकते हैं और शरीर में भी जमा हो सकते हैं। कुछ विशेष PFAS को स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जोड़ा गया है। हालांकि, किसी उत्पाद में PFAS की मौजूदगी का पता चलना अपने आप में यह साबित नहीं करता कि उस उत्पाद का सामान्य इस्तेमाल निश्चित रूप से बीमारी का कारण बनेगा। जोखिम इस बात पर निर्भर कर सकता है कि कौन-सा रसायन मौजूद है, उसकी मात्रा कितनी है और संपर्क कितने समय तक होता है।

पेपर स्ट्रॉ को लेकर एक और समस्या उनकी संरचना से जुड़ी है। कुछ स्ट्रॉ में कागज की कई परतों को जोड़ने के लिए गोंद या अन्य सामग्री का इस्तेमाल किया जाता है। इसके अलावा तरल पदार्थ के संपर्क में लंबे समय तक रहने पर स्ट्रॉ की सामग्री में बदलाव आ सकता है। हालांकि, इससे होने वाले संभावित स्वास्थ्य प्रभावों को समझने के लिए और अधिक शोध की आवश्यकता है।

स्टडी का एक दिलचस्प पहलू यह भी था कि PFAS केवल पेपर स्ट्रॉ में ही नहीं पाए गए। कुछ अन्य वैकल्पिक सामग्री से बनी स्ट्रॉ में भी इन रसायनों की मौजूदगी के संकेत मिले। यानी केवल पेपर स्ट्रॉ को ही पूरी तरह सुरक्षित या खतरनाक घोषित करना वैज्ञानिक रूप से सही नहीं होगा।

विशेषज्ञों के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति कभी-कभार पेपर स्ट्रॉ का इस्तेमाल करता है तो केवल इस स्टडी के आधार पर घबराने की जरूरत नहीं है। लेकिन रोजाना स्ट्रॉ से पेय पदार्थ पीने की आदत हो तो सीधे गिलास या कप से पीना एक सरल विकल्प हो सकता है। खासकर गर्म या लंबे समय तक रखे गए पेय पदार्थों के मामले में उत्पाद की गुणवत्ता और उसके इस्तेमाल के निर्देशों पर ध्यान देना जरूरी है।

पर्यावरण की दृष्टि से पेपर स्ट्रॉ प्लास्टिक कचरे को कम करने में मदद कर सकती हैं, लेकिन किसी भी विकल्प को चुनते समय पर्यावरणीय फायदे के साथ स्वास्थ्य और उत्पाद की संरचना को भी ध्यान में रखना जरूरी है।

इसलिए स्टडी का संदेश यह नहीं है कि हर पेपर स्ट्रॉ जहरीली है। बल्कि यह सवाल उठता है कि प्लास्टिक का विकल्प बनने वाले उत्पादों में इस्तेमाल होने वाले रसायनों की निगरानी और उनकी सुरक्षा की जांच कितनी जरूरी है। अगली बार स्ट्रॉ चुनते समय सिर्फ यह देखकर फैसला करना पर्याप्त नहीं होगा कि वह कागज की बनी है या प्लास्टिक की।