मुजफ्फरनगर: रिकॉर्ड फांसी की सजा सुनाने वाले जज रवि कुमार दिवाकर का बदला कार्यभार, अब फैमिली कोर्ट में मिली जिम्मेदारी
उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में फास्ट ट्रैक कोर्ट में तैनात रहे जज रवि कुमार दिवाकर की जिम्मेदारी बदल दी गई है। फांसी की सजा सुनाने वाले फैसलों को लेकर चर्चा में रहे दिवाकर को अब फैमिली कोर्ट में अपर प्रधान न्यायाधीश बनाया गया है। उनके नए कार्यभार को लेकर न्यायिक महकमे में चर्चा हो रही है।
रवि कुमार दिवाकर इससे पहले मुजफ्फरनगर में फास्ट ट्रैक कोर्ट में न्यायिक जिम्मेदारी संभाल रहे थे। इस दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण मामलों की सुनवाई की। गंभीर आपराधिक मामलों में सख्त सजा सुनाने के कारण भी उनका नाम चर्चा में रहा है। अब उनकी नई तैनाती परिवार न्यायालय में की गई है, जहां वह पारिवारिक विवादों से जुड़े मामलों की सुनवाई करेंगे।
फास्ट ट्रैक कोर्ट से फैमिली कोर्ट में तैनाती
जज रवि कुमार दिवाकर को फास्ट ट्रैक कोर्ट से हटाकर फैमिली कोर्ट में अपर प्रधान न्यायाधीश की जिम्मेदारी दी गई है। न्यायिक व्यवस्था में समय-समय पर अधिकारियों और न्यायिक अधिकारियों की तैनाती में बदलाव किया जाता है। इसी क्रम में उनकी जिम्मेदारी में बदलाव की जानकारी सामने आई है।
फैमिली कोर्ट में पति-पत्नी के बीच विवाद, वैवाहिक संबंधों से जुड़े मामले, तलाक, भरण-पोषण और परिवार से संबंधित अन्य कानूनी विवादों की सुनवाई होती है। ऐसे मामलों में कानून के अनुसार दोनों पक्षों को सुनकर निर्णय लिया जाता है। नई जिम्मेदारी के तहत दिवाकर को इसी तरह के मामलों से जुड़े न्यायिक कार्य देखने होंगे।
फैसलों को लेकर चर्चा में रहे हैं रवि कुमार दिवाकर
रवि कुमार दिवाकर का नाम गंभीर आपराधिक मामलों में सुनाए गए फैसलों को लेकर चर्चा में रहा है। फास्ट ट्रैक कोर्ट में उनकी तैनाती के दौरान जिन मामलों में कठोर सजा सुनाई गई, उनमें मृत्युदंड से जुड़े फैसले भी शामिल बताए जाते हैं। इसी वजह से उन्हें रिकॉर्ड संख्या में फांसी की सजा सुनाने वाले जज के रूप में भी चर्चा मिली।
हालांकि, किसी न्यायिक अधिकारी के फैसलों और उनकी तैनाती में बदलाव के बीच संबंध स्थापित करने के लिए आधिकारिक जानकारी जरूरी होती है। फिलहाल उपलब्ध विवरण में उनकी नई जिम्मेदारी के पीछे का कोई विशेष कारण सामने नहीं आया है।
नई जिम्मेदारी पर टिकी निगाहें
फैमिली कोर्ट में अपर प्रधान न्यायाधीश के रूप में उनकी तैनाती के बाद अब उनकी नई भूमिका पर नजर रहेगी। परिवार न्यायालय में आने वाले मामलों का सामाजिक और व्यक्तिगत जीवन पर सीधा असर पड़ता है। ऐसे मामलों में न्यायिक प्रक्रिया के साथ-साथ दोनों पक्षों के अधिकारों और कानूनी प्रावधानों का ध्यान रखना जरूरी होता है।
फिलहाल इतना स्पष्ट है कि रवि कुमार दिवाकर की जिम्मेदारी बदलकर उन्हें फैमिली कोर्ट में अपर प्रधान न्यायाधीश बनाया गया है। उनकी तैनाती से जुड़े आदेश और आधिकारिक विवरण सामने आने पर बदलाव की तारीख तथा अन्य प्रशासनिक जानकारियां स्पष्ट हो सकेंगी।