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मां का खून बच्चे को पोषण देता है, फिर भी क्यों अलग होते हैं ब्लड ग्रुप? जानिए वजह

 

गर्भावस्था को अक्सर प्रकृति का सबसे अद्भुत चमत्कार कहा जाता है। इस दौरान एक माँ अपने गर्भ में नौ महीने तक शिशु को पालती है और प्लेसेंटा के माध्यम से उसे पोषण, ऑक्सीजन और जरूरी तत्व प्रदान करती है। यही कारण है कि आमतौर पर लोगों के मन में यह सवाल उठता है कि जब मां का खून बच्चे तक पहुंचता है, तो दोनों का ब्लड ग्रुप एक जैसा क्यों नहीं होता?

असल में इसका जवाब मानव शरीर की जटिल लेकिन बेहद सुरक्षित जैविक व्यवस्था में छिपा है।

सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि मां का खून सीधे तौर पर बच्चे के शरीर में नहीं जाता। गर्भ में मौजूद प्लेसेंटा एक प्राकृतिक “फिल्टर” की तरह काम करता है, जो मां और बच्चे के बीच पोषक तत्वों का आदान-प्रदान तो करता है, लेकिन दोनों के रक्त को सीधे मिलने नहीं देता। इसका मतलब यह है कि मां का और बच्चे का ब्लड सर्कुलेशन अलग-अलग रहता है।

ब्लड ग्रुप मुख्य रूप से हमारे जीन (genes) पर निर्भर करता है, जो हमें माता-पिता दोनों से मिलते हैं। बच्चा अपने ब्लड ग्रुप के लिए मां और पिता दोनों के आनुवंशिक गुणों का मिश्रण प्राप्त करता है। यही कारण है कि बच्चे का ब्लड ग्रुप मां से अलग हो सकता है।

उदाहरण के लिए, अगर मां का ब्लड ग्रुप A है और पिता का B, तो बच्चे का ब्लड ग्रुप A, B, AB या O कुछ भी हो सकता है—यह पूरी तरह जेनेटिक संयोजन पर निर्भर करता है।

डॉक्टरों के अनुसार, अगर मां और बच्चे का ब्लड ग्रुप अलग भी हो, तब भी यह सामान्य स्थिति होती है। शरीर की इम्यून सिस्टम और प्लेसेंटा यह सुनिश्चित करते हैं कि दोनों के बीच कोई टकराव न हो और गर्भावस्था सुरक्षित बनी रहे।

हालांकि कुछ मामलों में Rh फैक्टर (Rh incompatibility) के कारण जटिलताएं हो सकती हैं, लेकिन आधुनिक चिकित्सा में इसका इलाज संभव है।

इस तरह, मां का खून बच्चे को पोषण जरूर देता है, लेकिन उसका ब्लड ग्रुप तय नहीं करता—बल्कि इसे तय करते हैं जीन और जैविक विरासत के नियम।