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फैरो आइलैंड्स में ‘ग्रिंडाड्रेप’ के तहत 700 से अधिक डॉल्फिन-व्हेल की हत्या, समुद्र में फैला लाल रंग

 

डेनमार्क के स्वायत्त क्षेत्र Faroe Islands में एक बार फिर पारंपरिक शिकार प्रथा ‘Grindadráp’ को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारी विवाद खड़ा हो गया है। रिपोर्ट के अनुसार इस प्रक्रिया के दौरान 700 से अधिक पायलट व्हेल और डॉल्फिन को समुद्र तट पर घेरकर मारा गया, जिसके बाद समुद्र का पानी लाल हो गया।

स्थानीय प्रशासन और समर्थकों के मुताबिक, ‘ग्रिंडाड्रेप’ सदियों पुरानी परंपरा है, जिसमें स्थानीय समुदाय समुद्री स्तनधारियों का शिकार कर भोजन और संसाधन प्राप्त करता है। हालांकि, इस बार मारे गए समुद्री जीवों की बड़ी संख्या ने वैश्विक स्तर पर चिंता और आलोचना को और तेज कर दिया है।

पशु अधिकार संगठनों ने इस घटना को “क्रूर और अनावश्यक” बताते हुए कड़ी निंदा की है। उनका कहना है कि आधुनिक समय में इस तरह के बड़े पैमाने पर शिकार को उचित नहीं ठहराया जा सकता, खासकर जब समुद्री जीवों की कई प्रजातियों पर पहले से ही पर्यावरणीय दबाव बढ़ रहा है।

स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार, शिकार के दौरान पारंपरिक तरीके से व्हेल और डॉल्फिन को उथले पानी की ओर मोड़ा गया, जहां उन्हें मार दिया गया। इसके बाद तटवर्ती इलाके में बड़ी संख्या में शव देखे गए, जिससे पर्यावरणीय प्रभाव को लेकर भी सवाल उठे हैं।

डेनमार्क सरकार की ओर से अक्सर इस परंपरा को फैरो आइलैंड्स के स्थानीय स्वशासन का हिस्सा बताते हुए हस्तक्षेप से दूरी रखी जाती है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस प्रथा को समाप्त करने की मांग लगातार बढ़ रही है।

पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे बड़े पैमाने पर शिकार से समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र पर असर पड़ सकता है और कई प्रजातियों की संख्या पर भी दबाव बढ़ता है। फिलहाल यह मामला एक बार फिर परंपरा बनाम संरक्षण की बहस को तेज कर रहा है, और दुनिया भर में इस घटना पर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।