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झारखंड में दिखा ‘मंगल ग्रह’ जैसा नजारा, चतरा का खैवा बना इंटरनेट सेंसेशन; जानें कैसे पहुंचें

 

झारखंड के चतरा जिले की एक अनोखी जगह इन दिनों सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है। लाल-भूरी चट्टानों, गहरी घाटी और प्राकृतिक संरचनाओं से घिरी यह जगह पहली नजर में किसी दूसरे ग्रह का नजारा लगती है। यही वजह है कि स्थानीय लोग इसे ‘वैली ऑफ मार्स’ यानी मंगल की घाटी भी कहने लगे हैं। इसका नाम है बंदारू खैवा जलप्रपात, जिसे खैवा पिकनिक स्पॉट के नाम से भी जाना जाता है।

लाल चट्टानों के बीच बहती फल्गु नदी

खैवा की सबसे बड़ी खासियत यहां दिखाई देने वाली लाल और कटी-फटी चट्टानें हैं। इनका आकार और रंग ऐसा नजर आता है कि तस्वीरों और वीडियो में यह इलाका मंगल ग्रह की सतह जैसा दिखाई देता है। चट्टानों के बीच से फल्गु नदी बहती है, जो इस प्राकृतिक नजारे को और आकर्षक बना देती है। वायरल वीडियो में भी इसी लाल चट्टानी घाटी और आसपास के प्राकृतिक दृश्य ने लोगों का ध्यान खींचा है।

सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो को ट्रैवल क्रिएटर फहाद हैदर ने शेयर किया था। वीडियो सामने आने के बाद बड़ी संख्या में लोगों ने हैरानी जताई कि झारखंड में इतनी अलग और खूबसूरत जगह मौजूद होने के बावजूद इसके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं।

चतरा से करीब 12 किलोमीटर दूर

बंदारू खैवा जलप्रपात झारखंड के चतरा जिले के लावालौंग ब्लॉक में स्थित है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार यह चतरा जिला मुख्यालय से करीब 12 किलोमीटर दूर है, जबकि रांची से इसकी दूरी लगभग 150 किलोमीटर बताई गई है।

यहां जाने वाले पर्यटकों को ध्यान रखना चाहिए कि अंतिम रास्ता पूरी तरह आसान नहीं है। रिपोर्ट के मुताबिक कुछ हिस्से कच्चे और मुश्किल हो सकते हैं। खासकर बरसात के दौरान रास्ता फिसलन भरा हो सकता है, इसलिए वाहन चलाते समय सावधानी जरूरी है।

कैसे पहुंचें खैवा?

चतरा पहुंचने के बाद लावालौंग की दिशा में जाना होगा। इसके बाद बंदारू क्षेत्र की ओर बढ़ते हुए खैवा पहुंचा जा सकता है। ऑनलाइन मैपिंग में भी बंदारू, लावालौंग क्षेत्र में खैवा के नाम से स्थान दर्ज है।

अगर आप पहली बार जा रहे हैं, तो स्थानीय लोगों से रास्ते की जानकारी लेना बेहतर रहेगा, क्योंकि ग्रामीण और कच्चे रास्तों की स्थिति मौसम के साथ बदल सकती है।

घूमने जा रहे हैं तो इन बातों का रखें ध्यान

खैवा प्राकृतिक क्षेत्र है, इसलिए यहां घूमते समय चट्टानों के किनारे जाने और तेज बहाव वाले पानी के पास उतरने से बचना चाहिए। मानसून के दौरान जलप्रपात और नदी का जलस्तर अचानक बढ़ सकता है। साथ ही, जंगल और ग्रामीण क्षेत्र होने के कारण दिन के समय यात्रा करना ज्यादा सुरक्षित और सुविधाजनक रहेगा।

चतरा का खैवा फिलहाल सोशल मीडिया की वजह से सुर्खियों में है, लेकिन इसकी असली खूबसूरती कैमरे के बजाय वहां पहुंचकर ही महसूस की जा सकती है। लाल चट्टानों, घाटी और पानी के बीच बना यह प्राकृतिक दृश्य झारखंड के उन छिपे पर्यटन स्थलों में शामिल है, जो वायरल होने के बाद अब देशभर के लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच रहे हैं।