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राजस्थान की राजधानी जयपुर से करीब 11 किलोमीटर दूर अरावली की पहाड़ियों के बीच स्थित आमेर किला राज्य के सबसे प्रसिद्ध ऐतिहासिक और पर्यटन स्थलों में से एक है। पीले और लाल बलुआ पत्थर से बना यह विशाल किला अपनी भव्य वास्तुकला, मजबूत किलेबंदी, महलों, मंदिरों और शीश महल के लिए दुनियाभर में जाना जाता है। पहाड़ी पर बना आमेर किला दूर से ही अपनी विशालता और खूबसूरती से पर्यटकों को आकर्षित करता है।

राजा मान सिंह ने करवाया था निर्माण

आमेर किले के वर्तमान स्वरूप के निर्माण का श्रेय आमतौर पर राजा मान सिंह प्रथम को दिया जाता है, जिन्होंने 16वीं शताब्दी के अंत में यहां महल परिसर का विस्तार कराया। बाद के शासकों ने भी किले में कई निर्माण और बदलाव करवाए। आमेर लंबे समय तक कछवाहा राजपूत शासकों की राजधानी रहा, जिसके बाद जयपुर शहर को नई राजधानी के रूप में विकसित किया गया।किले की वास्तुकला में राजपूत शैली के साथ मुगल प्रभाव भी साफ दिखाई देता है। महलों की सजावट, नक्काशीदार दरवाजे, विशाल आंगन और दीवारों पर की गई कलाकारी उस दौर की समृद्ध स्थापत्य परंपरा की झलक दिखाती है।

शीश महल है सबसे खास

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आमेर किले के प्रमुख आकर्षणों में शीश महल का नाम सबसे ऊपर आता है। महल की दीवारों और छतों पर छोटे-छोटे शीशों और सजावटी कांच का खूबसूरत काम किया गया है। कहा जाता है कि रोशनी पड़ने पर इन शीशों की चमक पूरे कमरे को जगमगा देती थी।किले में दीवान-ए-आम, दीवान-ए-खास, सुख निवास और गणेश पोल जैसे कई महत्वपूर्ण हिस्से हैं। गणेश पोल अपनी कलात्मक सजावट के कारण विशेष रूप से प्रसिद्ध है।

आमेर किले में मौजूद है प्राचीन मंदिर

किले के परिसर में शिला देवी मंदिर भी स्थित है। यह मंदिर कछवाहा राजपरिवार की आस्था से जुड़ा रहा है। नवरात्रि जैसे विशेष अवसरों पर यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। मंदिर की धार्मिक और ऐतिहासिक महत्ता आमेर किले को केवल पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा बनाती है।

माओटा झील से दिखता है खूबसूरत नजारा

आमेर किले के सामने स्थित माओटा झील इसकी खूबसूरती को और बढ़ाती है। पहाड़ी पर स्थित किले और नीचे फैली झील का दृश्य बेहद आकर्षक दिखाई देता है। पुराने समय में झील किले की जल व्यवस्था के लिए भी महत्वपूर्ण मानी जाती थी।किले तक पहुंचने के लिए पर्यटक सड़क मार्ग का इस्तेमाल कर सकते हैं। आमेर का इलाका जयपुर शहर से आसानी से जुड़ा हुआ है, इसलिए यहां देश-विदेश से आने वाले पर्यटक बड़ी संख्या में पहुंचते हैं।

यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल

आमेर किला राजस्थान के Hill Forts of Rajasthan समूह का हिस्सा है, जिसे यूनेस्को ने 2013 में विश्व धरोहर स्थल के रूप में मान्यता दी थी। इस समूह में राजस्थान के छह ऐतिहासिक पहाड़ी किले शामिल हैं। आमेर किले की स्थापत्य शैली, ऐतिहासिक महत्व और सांस्कृतिक विरासत इसे विशेष बनाती है।

पर्यटकों के लिए खास आकर्षण

आमेर किले में घूमते समय विशाल प्रवेश द्वार, महल, मंदिर, नक्काशी, शीश महल और अरावली की पहाड़ियों का खूबसूरत दृश्य पर्यटकों को आकर्षित करता है। शाम के समय यहां होने वाले लाइट एंड साउंड शो के जरिए किले के इतिहास और जयपुर की विरासत को समझने का अवसर भी मिलता है।

आमेर किला केवल पत्थरों से बनी एक पुरानी इमारत नहीं, बल्कि राजस्थान के राजपूत इतिहास, कला, संस्कृति और स्थापत्य का जीवंत उदाहरण है। जयपुर आने वाले पर्यटकों की यात्रा आमेर किले के बिना अधूरी मानी जाती है। इसकी भव्य दीवारें आज भी राजस्थान के गौरवशाली अतीत की कहानी सुनाती हैं।