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घर का चूल्हा जलाने के लिए जान जोखिम में डाल रहा मजदूर, वायरल हुआ Video

 

जमीन से 100 फीट से भी ज्यादा ऊपर… नीचे गहराई और ऊपर जिंदगी का जोखिम। लेकिन इसी ऊंचाई पर एक मजदूर तार पर बैठकर खाना खा रहा है। यह सिर्फ खाना खाने का दृश्य नहीं है, बल्कि उस मजबूरी की तस्वीर है, जहां पेट की भूख इंसान के अंदर के डर से भी बड़ी हो जाती है।

जमीन से 100 फीट से भी ज्यादा ऊपर…
टावर की तार पर बैठकर खाना खा रहे हैं। 💔

ये सिर्फ खाना नहीं है…
ये उस गरीबी का निवाला है, जिसे कमाने के लिए इंसान अपनी जान तक जोखिम में डाल देता है।

नीचे गिरने का डर है,
लेकिन उससे बड़ा डर है घर में चूल्हा न जलने का।

हाथों में हुनर है, माथे… pic.twitter.com/16wNcAYLjW

— Suraj Maurya🇮🇳 (@SurajMaurya03) September 7, 2026

जमीन से 100 फीट से भी ज्यादा ऊपर…
टावर की तार पर बैठकर खाना खा रहे हैं। 💔

ये सिर्फ खाना नहीं है…
ये उस गरीबी का निवाला है, जिसे कमाने के लिए इंसान अपनी जान तक जोखिम में डाल देता है।

नीचे गिरने का डर है,
लेकिन उससे बड़ा डर है घर में चूल्हा न जलने का।

हाथों में हुनर है, माथे… pic.twitter.com/16wNcAYLjW

— Suraj Maurya🇮🇳 (@SurajMaurya03) September 7, 2026

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जहां हमारे लिए इतनी ऊंचाई पर खड़ा होना भी डरावना हो सकता है, वहीं किसी के लिए यही ऊंचाई रोजी-रोटी का जरिया बनी हुई है। हाथों में हुनर है, माथे पर पसीना है और मन में सिर्फ एक चिंता—आज इतनी कमाई हो जाए कि घर का चूल्हा जल सके और बच्चे भूखे न सोएं।जान का खतरा हर पल बना रहता है। एक छोटी सी चूक जिंदगी बदल सकती है। लेकिन जिम्मेदारियों का बोझ कई बार इंसान को अपने डर से समझौता करने पर मजबूर कर देता है।

गरीबी सिर्फ पैसों की कमी नहीं होती। कई बार गरीबी का मतलब होता है—अपने आराम, अपने डर और यहां तक कि अपनी सुरक्षा से भी समझौता करना।हममें से ज्यादातर लोग जहां खतरा देखकर पीछे हट जाएंगे, वहीं ये मेहनतकश लोग अपने परिवार का पेट पालने के लिए रोज उसी खतरे का सामना करते हैं।सलाम है उन मेहनती हाथों को, जो खुद मुश्किलों में रहकर भी अपने परिवार के बेहतर भविष्य के लिए लगातार मेहनत कर रहे हैं। सोचिए… अगर मजबूरी इतनी बड़ी हो कि जान का खतरा भी छोटा लगने लगे, तो उस जिंदगी का दर्द कितना गहरा होगा?