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‘बस आज पास करवा दो भगवान’ कॉर्पोरेट नौकरी पर महिला का VIDEO वायरल

 

कॉर्पोरेट नौकरी बाहर से देखने पर जितनी आकर्षक लगती है, उसकी असल जिंदगी कई बार उतनी ही चुनौतीपूर्ण होती है। रोज की 9 से 5 की नौकरी, लगातार डेडलाइन, मीटिंग्स और खुद को बेहतर साबित करने का दबाव कर्मचारियों के लिए तनाव की वजह बन जाता है। ऐसे में बेंगलुरु की रहने वाली चारू गुप्ता ने कॉर्पोरेट लाइफ की तुलना एक ऐसे स्कूल से की है, जहां पढ़ाई की जगह काम करना पड़ता है और बदले में सैलरी मिलती है।


चारू के इस मजेदार लेकिन गंभीर अंदाज में कही गई बात का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में उन्होंने अपनी तीन साल की कॉर्पोरेट जॉब के अनुभव साझा करते हुए बताया कि नौकरी शुरू करने के बाद भी उन्हें कई बार ऐसा महसूस होता है जैसे वह दोबारा स्कूल में पहुंच गई हों।

हर सुबह लगता है जैसे आज कोई एग्जाम है

चारू बताती हैं कि ऑफिस जाने से पहले कई बार उनके मन में वही डर रहता है, जो स्कूल के दिनों में परीक्षा से पहले हुआ करता था। हर सुबह ऐसा लगता है कि आज कोई बड़ा टेस्ट होने वाला है और बस किसी तरह दिन बिना किसी परेशानी के निकल जाए।

उनकी यह बात सोशल मीडिया यूजर्स को काफी पसंद आई, क्योंकि नौकरीपेशा लोगों का एक बड़ा वर्ग डेडलाइन, काम के दबाव और लगातार बढ़ती जिम्मेदारियों से खुद को जोड़ पा रहा है।

पेंडिंग काम बना कॉर्पोरेट का ‘होमवर्क’

चारू ने कॉर्पोरेट नौकरी और स्कूल के बीच कई समानताएं भी बताईं। उनके मुताबिक, ऑफिस का पेंडिंग काम स्कूल के होमवर्क जैसा है, जो समय पर पूरा नहीं किया तो अगले दिन परेशानी खड़ी हो सकती है।

पूरे हफ्ते काम के बीच कई टास्क टलते रहते हैं और फिर वीकेंड आते ही दिमाग में सोमवार का काम घूमने लगता है। खासकर रविवार की शाम और रात को कई कर्मचारियों को अगले दिन की मीटिंग, डेडलाइन और अधूरे टास्क की चिंता सताने लगती है।

कई बार लोग रविवार की रात लैपटॉप खोलकर काम पूरा करते हैं। चारू के मुताबिक, यह अनुभव उन्हें बचपन के उन दिनों की याद दिलाता है, जब सोमवार को स्कूल जाने से पहले रविवार रात को अधूरा होमवर्क पूरा किया जाता था।

वीडियो पर कर्मचारियों ने कहा- ‘हम भी यही महसूस करते हैं’

चारू का वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर बड़ी संख्या में लोगों ने अपनी प्रतिक्रियाएं दीं। कई कर्मचारियों ने कहा कि उन्होंने भी कॉर्पोरेट लाइफ में बिल्कुल ऐसा ही अनुभव किया है।

कुछ लोगों ने मजाक में कहा कि स्कूल में कम से कम छुट्टी और गर्मियों की छुट्टियां तो मिलती थीं, जबकि कॉर्पोरेट नौकरी में ईमेल और काम का दबाव छुट्टी के दिनों में भी पीछा नहीं छोड़ता।

दिलचस्प बात यह है कि कुछ मैनेजर्स और अनुभवी कर्मचारियों ने भी चारू की बात से सहमति जताई। उनका कहना था कि काम का दबाव केवल नए कर्मचारियों तक सीमित नहीं है, बल्कि अलग-अलग स्तर पर जिम्मेदारियां बढ़ने के साथ तनाव का रूप भी बदलता रहता है।

वहीं, कुछ यूजर्स ने सलाह दी कि नौकरी कितनी भी व्यस्त क्यों न हो, मानसिक सुकून के लिए काम और निजी जिंदगी के बीच संतुलन बनाना जरूरी है।

चारू गुप्ता का यह वीडियो भले ही मजाकिया अंदाज में कॉर्पोरेट लाइफ की तुलना स्कूल से करता है, लेकिन इसके पीछे की बात उन लाखों कर्मचारियों की रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़ी हुई है, जो हर दिन डेडलाइन और जिम्मेदारियों के बीच अपना संतुलन बनाने की कोशिश करते हैं।