☰
×

दिल्ली में रहकर बेंगलुरु में नौकरी! हर दूसरे हफ्ते फ्लाइट से ऑफिस जाने का आइडिया, खर्च जानकर चौंक जाएंगे
 

 

आज के दौर में नौकरी के लिए दूसरे शहर में रहना आम बात है, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि नौकरी बेंगलुरु में हो और घर दिल्ली में? सुनने में यह थोड़ा अजीब जरूर लगता है, लेकिन बदलते वर्क कल्चर में कुछ लोग ऐसा करने का विकल्प तलाश रहे हैं। सोशल मीडिया पर भी दिल्ली में रहकर बेंगलुरु में नौकरी करने और हर दूसरे हफ्ते फ्लाइट से ऑफिस पहुंचने के आइडिया को लेकर चर्चा हो रही है। इस तरह की व्यवस्था में सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर हवाई यात्रा, रहने और दूसरे खर्चों को मिलाकर कुल बजट कितना बनता है।

दिल्ली में घर, बेंगलुरु में ऑफिस

बेंगलुरु देश के प्रमुख आईटी और टेक्नोलॉजी केंद्रों में से एक है। यहां बड़ी संख्या में टेक कंपनियां और स्टार्टअप मौजूद हैं। दूसरी ओर, दिल्ली-एनसीआर में भी रोजगार और कारोबार के कई अवसर हैं। ऐसे में कुछ कर्मचारी अपने परिवार, घर या निजी कारणों से दिल्ली में रहना पसंद कर सकते हैं, जबकि उनकी नौकरी बेंगलुरु में हो सकती है।

यदि कंपनी हाइब्रिड वर्क मॉडल अपनाती है और कर्मचारियों को हर दिन ऑफिस आने की जरूरत नहीं होती, तो हर दूसरे हफ्ते यात्रा करने का विचार आकर्षक लग सकता है। कर्मचारी कुछ दिन बेंगलुरु में ऑफिस से काम कर सकता है और बाकी समय दिल्ली से काम करने की कोशिश कर सकता है। हालांकि, इसके लिए कंपनी की अनुमति और काम की प्रकृति सबसे महत्वपूर्ण है।

फ्लाइट का खर्च कितना आएगा?

दिल्ली से बेंगलुरु के बीच हवाई यात्रा में आमतौर पर करीब ढाई से तीन घंटे लगते हैं। लेकिन एयरपोर्ट तक पहुंचने, चेक-इन, सुरक्षा जांच और सामान लेने का समय भी जोड़ना पड़ता है।

हवाई टिकट की कीमत यात्रा की तारीख, एयरलाइन, बुकिंग कितने दिन पहले की गई है और छुट्टियों के सीजन पर निर्भर करती है। उदाहरण के लिए, यदि आने-जाने के टिकट का कुल खर्च 8,000 से 15,000 रुपये के बीच पड़ता है और कर्मचारी महीने में दो बार यह यात्रा करता है, तो केवल फ्लाइट पर लगभग 16,000 से 30,000 रुपये खर्च हो सकते हैं। यह एक अनुमान है, किसी खास तारीख का वास्तविक किराया नहीं।

रहने और आने-जाने का खर्च भी जोड़ें

फ्लाइट के अलावा बेंगलुरु में रहने, ऑफिस आने-जाने और खाने-पीने पर भी पैसा खर्च होगा। यदि कर्मचारी होटल में ठहरता है, तो बजट काफी बढ़ सकता है। वहीं, किसी दोस्त के साथ रहने, साझा आवास लेने या कंपनी की ओर से ठहरने की सुविधा मिलने पर खर्च कम हो सकता है।

एक उदाहरण के तौर पर, महीने में चार से छह रात होटल या अन्य आवास में ठहरने, स्थानीय परिवहन और भोजन का खर्च कई हजार रुपये हो सकता है। इस तरह हवाई टिकट और अन्य खर्चों को मिलाकर मासिक बजट 25,000 से 50,000 रुपये या इससे अधिक भी पहुंच सकता है। वास्तविक खर्च यात्रा की आवृत्ति और रहने की व्यवस्था पर निर्भर करेगा।

क्या यह तरीका फायदे का सौदा है?

इस व्यवस्था का फायदा यह हो सकता है कि कर्मचारी अपने परिवार के साथ दिल्ली में रह सके और बेंगलुरु की नौकरी भी जारी रख सके। लेकिन लगातार हवाई यात्रा से थकान, समय की बर्बादी और अतिरिक्त खर्च बढ़ सकते हैं। फ्लाइट में देरी या रद्द होने पर ऑफिस पहुंचने की योजना भी प्रभावित हो सकती है।

इसलिए ऐसा फैसला लेने से पहले वेतन, यात्रा भत्ता, कंपनी की वर्क-फ्रॉम-होम नीति और रहने के खर्च की तुलना करना जरूरी है। यदि कंपनी महीने में केवल कुछ दिन ऑफिस बुलाती है और यात्रा का खर्च वहन करती है, तो यह विकल्प ज्यादा व्यावहारिक हो सकता है।

कुल मिलाकर, दिल्ली में रहकर बेंगलुरु में नौकरी करने का आइडिया सुनने में दिलचस्प है, लेकिन इसकी सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि कर्मचारी की आय कितनी है, कंपनी कितनी छूट देती है और यात्रा का खर्च उसके बजट पर कितना असर डालता है।