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जयपुर के इस स्कूल की बदलेगी तस्वीर, पुरानी इमारत पर चला बुलडोजर

 

राजस्थान के जयपुर से सरकारी स्कूल की बदहाल स्थिति को लेकर एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने शिक्षा व्यवस्था और बच्चों के लिए उपलब्ध सुविधाओं पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सोशल मीडिया पर सामने आई जानकारी के मुताबिक, जयपुर में एक सरकारी स्कूल लंबे समय से भैंसों के बाड़े में संचालित हो रहा था, जहां बच्चों को पढ़ाई करनी पड़ रही थी।

The old building of the govt school in Jaipur, Rajasthan which was running out of a buffalo-shed has been demolised and will be rebuilt after CJP held protest under its nationwide "SchoolThikkaro" Abhiyaan. pic.twitter.com/IfTYTvkc4s

— Piyush Rai (@Benarasiyaa) September 3, 2026

The old building of the govt school in Jaipur, Rajasthan which was running out of a buffalo-shed has been demolised and will be rebuilt after CJP held protest under its nationwide "SchoolThikkaro" Abhiyaan. pic.twitter.com/IfTYTvkc4s

— Piyush Rai (@Benarasiyaa) September 3, 2026


बताया जा रहा है कि स्कूल की पुरानी इमारत बेहद खराब स्थिति में थी और बच्चों के लिए बेहतर शैक्षणिक माहौल उपलब्ध नहीं था। इसी मुद्दे को लेकर CJP (Citizens for Justice and Peace) की ओर से अपने राष्ट्रव्यापी ‘SchoolThikkaro’ अभियान के तहत विरोध प्रदर्शन किया गया।

विरोध और अभियान के बाद अब स्कूल की पुरानी इमारत को ध्वस्त कर दिया गया है। सामने आई जानकारी के अनुसार, इस जगह पर अब नई स्कूल बिल्डिंग का निर्माण किया जाएगा, जिससे बच्चों को पढ़ाई के लिए बेहतर और सुरक्षित माहौल मिल सके।

इस पूरे मामले की तस्वीरें और जानकारी सोशल मीडिया पर तेजी से चर्चा में हैं। लोगों का कहना है कि सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को भी अच्छी बिल्डिंग, सुरक्षित क्लासरूम और बेहतर सुविधाएं मिलना उनका अधिकार है। अगर किसी स्कूल में बच्चों को ऐसी परिस्थितियों में पढ़ना पड़ रहा है, तो यह व्यवस्था के लिए गंभीर सवाल है।

‘SchoolThikkaro’ अभियान के जरिए उठाए गए इस मुद्दे के बाद स्कूल की पुरानी इमारत का टूटना और नई बिल्डिंग बनाए जाने की खबर को कई लोग सकारात्मक बदलाव के तौर पर देख रहे हैं। अब लोगों की नजर इस बात पर रहेगी कि नई बिल्डिंग का निर्माण कितनी जल्दी पूरा होता है और बच्चों को बेहतर सुविधाएं कब तक मिल पाती हैं।

जयपुर के इस मामले ने एक बार फिर यह सवाल सामने ला दिया है कि देश के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को क्या पर्याप्त और सुरक्षित बुनियादी सुविधाएं मिल रही हैं?