18 साल बाद दोबारा भारत घूमने आई इजरायली महिला, मुंबई की झुग्गी बस्ती देखकर बोली- यहां आना अजीब लगा
करीब 18 साल बाद भारत घूमने पहुंची एक इजरायली महिला का मुंबई दौरा चर्चा में है। लंबे अंतराल के बाद जब वह दोबारा भारत आईं तो शहर में हुए बदलावों के साथ-साथ उन्हें यहां की सामाजिक और आर्थिक तस्वीर भी देखने को मिली। मुंबई की एक झुग्गी बस्ती देखकर उन्होंने अपना अनुभव साझा किया और कहा कि वहां पहुंचकर उन्हें अजीब सा महसूस हुआ।
इजरायली महिला के मुताबिक, करीब 18 साल पहले जब वह भारत आई थीं, तब उनका अनुभव आज से काफी अलग था। इतने लंबे समय के बाद दोबारा भारत आने पर उन्हें कई चीजें बदली हुई नजर आईं। मुंबई की सड़कों, इमारतों, ट्रैफिक और लोगों की बढ़ती संख्या ने उनका ध्यान खींचा।
मुंबई घूमने के दौरान जब वह एक झुग्गी बस्ती के इलाके में पहुंचीं तो वहां का माहौल उनके लिए बिल्कुल अलग अनुभव था। एक तरफ शहर में ऊंची-ऊंची इमारतें, बड़े कारोबारी इलाके और आधुनिक सुविधाएं हैं, वहीं दूसरी तरफ बेहद कम जगह में बड़ी संख्या में लोग रहते हुए दिखाई देते हैं। इस विरोधाभास ने उन्हें सोचने पर मजबूर कर दिया।
महिला ने बताया कि झुग्गी बस्ती को देखकर उनके मन में कई सवाल आए। उनके लिए यह अनुभव इसलिए भी असामान्य था क्योंकि वह ऐसे इलाकों को अपने देश में अलग तरीके से देखती रही हैं। भारत में एक ही शहर के भीतर जीवन के इतने अलग-अलग स्तर दिखाई देना उनके लिए चौंकाने वाला अनुभव रहा।
हालांकि, उन्होंने यह भी महसूस किया कि केवल बाहर से किसी जगह को देखकर वहां रहने वाले लोगों की जिंदगी को पूरी तरह समझा नहीं जा सकता। झुग्गी बस्ती में रहने वाले लोग भी अपने परिवार, काम और रोजमर्रा की जरूरतों के साथ सामान्य जीवन जीने की कोशिश करते हैं। उनके लिए यह इलाका सिर्फ रहने की जगह नहीं, बल्कि उनका घर और समुदाय है।
18 साल के अंतराल के बाद भारत लौटने का अनुभव उनके लिए सिर्फ पर्यटन तक सीमित नहीं रहा। मुंबई में घूमते हुए उन्हें भारत के विकास और उसकी चुनौतियों दोनों की झलक दिखाई दी। आधुनिक इमारतों और तेजी से विकसित होते इलाकों के साथ शहर में आर्थिक असमानता भी साफ नजर आती है।
उनका अनुभव सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया है। कुछ लोगों ने कहा कि विदेशी पर्यटकों को भारत की ऐसी वास्तविक तस्वीर देखकर कई बार हैरानी होती है। वहीं कुछ लोगों ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि मुंबई को समझने के लिए केवल पर्यटन स्थलों को देखना पर्याप्त नहीं है, बल्कि शहर के अलग-अलग हिस्सों और वहां रहने वाले लोगों की जिंदगी को समझना भी जरूरी है।
मुंबई लंबे समय से विरोधाभासों का शहर माना जाता है। यहां एक ओर देश के बड़े उद्योगपति और कारोबारी रहते हैं तो दूसरी ओर बड़ी संख्या में मजदूर और निम्न आय वर्ग के लोग भी शहर की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यही विविधता मुंबई की पहचान का हिस्सा है।
18 साल बाद भारत लौटी इजरायली महिला का अनुभव इसी विविधता से जुड़ा है। झुग्गी बस्ती देखकर उन्हें भले ही शुरुआत में अजीब लगा हो, लेकिन इस अनुभव ने उन्हें भारत के उस पहलू से रूबरू कराया, जो किसी सामान्य पर्यटक यात्रा में शायद आसानी से नजर नहीं आता। उनके लिए यह सफर घूमने के साथ-साथ भारत को एक अलग नजरिए से समझने का मौका भी बन गया।