गरबा संस्कृति है या सिर्फ वायरल होने का ट्रेंड? इंटरनेट पर लोगों से पूछा गया बड़ा सवाल!
गरबा आस्था और संस्कृति का उत्सव है या सोशल मीडिया पर वायरल होने का नया जरिया? नवरात्रि के इस पारंपरिक नृत्य को लेकर सोशल मीडिया पर एक नई बहस छिड़ गई है। X पर हनुमान (@Hanu_44) नाम के यूजर ने सवाल उठाया कि महिलाओं के शरीर को घूरने वाले पुरुषों की आलोचना करना सही है, लेकिन सोशल मीडिया पर लोकप्रियता पाने के लिए गरबा के पारंपरिक स्वरूप में किए जा रहे बदलावों पर भी सवाल उठने चाहिए।
Men who stare at women's bodies are rightly criticized, but changes to the traditional form of Garba in the pursuit of social media fame should also be questioned.
— Hanuman (@Hanu_44) October 17, 2026
Is Garba still a celebration of faith and culture, or has it become just another way to go viral on social media?… pic.twitter.com/IrJAz9az2g
Men who stare at women's bodies are rightly criticized, but changes to the traditional form of Garba in the pursuit of social media fame should also be questioned.
— Hanuman (@Hanu_44) October 17, 2026
Is Garba still a celebration of faith and culture, or has it become just another way to go viral on social media?… pic.twitter.com/IrJAz9az2g
पोस्ट में यूजर ने पूछा कि क्या गरबा आज भी आस्था, भक्ति और संस्कृति का उत्सव बना हुआ है, या फिर यह भी सोशल मीडिया पर वायरल होने का एक और माध्यम बनता जा रहा है?दरअसल, आज के दौर में इंस्टाग्राम रील्स और दूसरी सोशल मीडिया साइट्स पर गरबा वीडियो खूब शेयर किए जाते हैं। लोग अपने डांस स्टेप्स, कपड़ों और अलग-अलग अंदाज के जरिए लोगों का ध्यान खींचने की कोशिश करते हैं। ऐसे में कुछ लोगों का मानना है कि लोकप्रियता की दौड़ में पारंपरिक गरबा की मूल भावना पीछे छूटती जा रही है।
वहीं, दूसरी ओर यह भी कहा जा सकता है कि समय के साथ किसी भी संस्कृति के प्रस्तुत करने का तरीका बदल सकता है। नए डांस स्टाइल और सोशल मीडिया के जरिए गरबा देश-दुनिया के ज्यादा लोगों तक पहुंच रहा है। केवल अलग अंदाज में नृत्य करने को संस्कृति का अपमान मानना भी उचित नहीं होगा।हालांकि, महिलाओं को घूरना या उनके साथ अनुचित व्यवहार करना किसी भी स्थिति में सही नहीं है। इसी तरह, परंपराओं पर चर्चा करते समय भी किसी व्यक्ति की पसंद, पहनावे या अभिव्यक्ति को लेकर बिना वजह निशाना बनाने से बचना चाहिए।