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हर झगड़े के बाद ब्लॉक करना प्यार है या सजा? रिश्ते की ये आदत कब बन जाती है भावनात्मक दूरी
 

 

रिश्तों में छोटी-छोटी बातों पर नाराजगी होना आम है। कभी बातचीत से मामला सुलझ जाता है तो कभी दोनों को थोड़ा वक्त चाहिए होता है। लेकिन अगर हर विवाद के बाद एक पार्टनर दूसरे को ब्लॉक करने लगे, तो क्या यह सिर्फ 'स्पेस' लेने का तरीका है या फिर रिश्ते में भावनात्मक दबाव बनाने की कोशिश?

एक लड़के और लड़की की कहानी इस सवाल को बेहद करीब से समझाती है।

हर झगड़े के बाद लड़की कर देती थी ब्लॉक

दोनों एक रिश्ते में थे। जब भी उनके बीच किसी बात को लेकर बहस होती, लड़की लड़के को ब्लॉक कर देती। कभी दो-तीन दिन के लिए, कभी एक हफ्ते के लिए और कभी इससे भी ज्यादा समय तक।

लड़का लगातार उसे कॉल और मैसेज करने की कोशिश करता। वह इंतजार करता कि शायद लड़की का गुस्सा शांत हो जाए। कुछ समय बाद लड़की खुद उसे अनब्लॉक करती और कहती, "अब मेरा गुस्सा खत्म हो गया, बात करते हैं। तुम्हारी याद आ रही थी।"

लड़का भी हर बार उसे माफ कर देता।

धीरे-धीरे लड़के ने अपनी बातें कहना बंद कर दिया

लेकिन बार-बार होने वाली इस स्थिति का असर धीरे-धीरे रिश्ते पर पड़ने लगा। लड़के ने अपने मन की बातें साझा करना कम कर दिया।

उसे डर लगने लगा कि अगर उसने कुछ ऐसा कह दिया जो लड़की को पसंद नहीं आया, तो वह फिर उसे ब्लॉक कर देगी। यानी रिश्ते में खुलकर बात करने के बजाय वह अपनी बातों को तौलने लगा।

यहीं से रिश्ते में एक बड़ा बदलाव शुरू हो चुका था।

इस बार लड़के ने नहीं की कोई कोशिश

एक दिन दोनों के बीच फिर किसी बात को लेकर झगड़ा हुआ और लड़की ने हमेशा की तरह लड़के को ब्लॉक कर दिया।

लेकिन इस बार लड़के ने उसे मनाने की कोशिश नहीं की। न कॉल किया, न मैसेज भेजा और न ही किसी दूसरे रास्ते से संपर्क करने की कोशिश की।

दो हफ्ते बाद लड़की ने खुद उसे अनब्लॉक किया और सवाल किया कि इस बार उसने उसे मनाने की कोशिश क्यों नहीं की।

लड़के का जवाब बेहद अलग था।

एक लड़का और लड़की रिलेशनशिप में थे।

शुरुआत में सब ठीक था, लेकिन धीरे धीरे हर लड़ाई के बाद लड़की लड़के को block करने लगी। कभी दो तीन दिन, कभी एक हफ्ते और कभी उससे भी ज्यादा।

लड़का कॉल और मैसेज करता रहता, फिर एक दिन लड़की खुद अनब्लॉक करके कहती - गुस्सा खत्म हो गया, बात करो, मिस्ड… pic.twitter.com/elOF3nssji

— मिच्च मसाला (@micchamasala) August 31, 2026


उसने कहा कि अब उसे समझ आ गया है कि हर बार ब्लॉक करना सिर्फ नाराजगी जताना नहीं था, बल्कि उसे सजा देने का एक तरीका बन चुका था। पहले वह इंतजार करता था कि यह 'सजा' कब खत्म होगी, लेकिन अब उसने तय कर लिया था कि वह इस तरह के व्यवहार का हिस्सा नहीं बनेगा।

क्या हर बार ब्लॉक करना 'स्पेस' लेना है?

रिश्ते में किसी बहस के बाद कुछ समय अकेले रहना गलत नहीं है। कई बार गुस्सा शांत करने और चीजों को बेहतर तरीके से समझने के लिए थोड़ी दूरी जरूरी होती है।

लेकिन 'मुझे थोड़ा वक्त चाहिए, बाद में बात करते हैं' और बिना किसी बातचीत के बार-बार ब्लॉक कर देना, दोनों बिल्कुल अलग चीजें हैं।

अगर कोई व्यक्ति हर झगड़े के बाद ब्लॉक करके दूसरे को परेशान करता है, उसे बार-बार मनाने के लिए मजबूर करता है या संपर्क खत्म करने को एक तरह की सजा की तरह इस्तेमाल करता है, तो यह स्वस्थ संवाद का तरीका नहीं माना जा सकता।

रिश्ते में जरूरी है खुलकर बातचीत

किसी भी मजबूत रिश्ते की नींव सिर्फ प्यार नहीं, बल्कि भरोसा और संवाद भी होता है। नाराजगी हो सकती है, बहस हो सकती है और दोनों को कभी-कभी स्पेस की जरूरत भी पड़ सकती है।

लेकिन अगर एक पार्टनर लगातार इस डर में रहने लगे कि अपनी बात कहने पर उसे छोड़ दिया जाएगा या ब्लॉक कर दिया जाएगा, तो रिश्ता धीरे-धीरे असुरक्षित महसूस होने लगता है।

इस कहानी का सवाल इसलिए सिर्फ इतना नहीं है कि "ब्लॉक करना सही है या गलत?" असली सवाल यह है कि क्या रिश्ते में दोनों लोग बिना डर के अपनी बात कह सकते हैं?

अगर जवाब 'नहीं' है, तो समस्या सिर्फ एक झगड़े की नहीं, बल्कि रिश्ते में संवाद के तरीके की हो सकती है।

क्या आपके साथ भी कभी ऐसा हुआ है कि किसी पार्टनर ने हर लड़ाई के बाद आपको ब्लॉक किया हो? और आपके हिसाब से ऐसी स्थिति में ब्लॉक करना सिर्फ 'स्पेस' लेना है या भावनात्मक अपरिपक्वता?