₹15.40 लाख के iPhone का सौदा, सिर्फ ₹20 हजार एडवांस… फिर क्या हुआ? देखें वीडियो
ऑनलाइन खरीदारी के नाम पर धोखाधड़ी का एक मामला चर्चा में है। दावा किया जा रहा है कि एक फोन विक्रेता ने iPhone खरीदने के लिए ऑनलाइन सौदा किया, लेकिन पैसे लेने के बाद न तो मोबाइल फोन की डिलीवरी हुई और न ही विक्रेता से संपर्क हो पा रहा है। बताया जा रहा है कि इस सौदे में iPhone 11 से लेकर iPhone 17 तक के सेकंड हैंड फोन शामिल थे।
100pc iPhone एक फोन विक्रेता ने मंगाया था, फोन 2nd थे और इनमें फोन मिक्स थे 11 से लेकर 17तक
— Anis Ahmad (@Ansari5k) October 10, 2026
बात पड़ोसी देश की है जहां सौदा ऑनलाइन हुआ था कुल ₹15,40000 हुआ था
बुकिंग पेमेंट ₹20,000 एडवांस लिया गया था।
पूरे 10 दिन गुज़र गए लेकिन न ही फोन की डिलीवरी हुई और अब तो फोन भी… pic.twitter.com/ok1wy1eSPw
100 सेकंड हैंड iPhone का हुआ था सौदा
मिली जानकारी के मुताबिक, यह मामला भारत के पड़ोसी देश का बताया जा रहा है। एक फोन विक्रेता ने ऑनलाइन माध्यम से कुल 100 सेकंड हैंड iPhone मंगाने का सौदा किया था। इन फोन में iPhone 11 से लेकर iPhone 17 तक के अलग-अलग मॉडल शामिल बताए जा रहे हैं।इस पूरे सौदे की रकम करीब 15 लाख 40 हजार रुपये बताई गई है। सौदा तय होने के बाद खरीदार से 20 हजार रुपये एडवांस के तौर पर जमा कराए गए थे। इसके बाद खरीदार को फोन की डिलीवरी का इंतजार था।
10 दिन बीते, लेकिन नहीं पहुंचे फोन
दावे के अनुसार, एडवांस पेमेंट किए हुए करीब 10 दिन गुजर चुके हैं, लेकिन अभी तक मोबाइल फोन खरीदार तक नहीं पहुंचे। शुरुआत में खरीदार को उम्मीद थी कि जल्द ही सभी फोन की डिलीवरी हो जाएगी, लेकिन समय बीतने के साथ परेशानी बढ़ने लगी।सबसे ज्यादा चिंता की बात यह बताई जा रही है कि अब संबंधित विक्रेता का फोन भी स्विच ऑफ आ रहा है। ऐसे में खरीदार के सामने यह सवाल खड़ा हो गया है कि आखिर उसके ऑर्डर का क्या हुआ और एडवांस के पैसे वापस कैसे मिलेंगे।
💸 ऑनलाइन सौदा करने वालों के लिए सबक
यह मामला ऑनलाइन कारोबार में सावधानी बरतने की जरूरत को फिर से सामने लाता है। खासकर जब बड़ी संख्या में महंगे इलेक्ट्रॉनिक सामान खरीदने की बात हो, तो केवल मैसेज या फोन पर भरोसा करके पैसे भेजना जोखिम भरा हो सकता है।ऐसे सौदे से पहले विक्रेता की पहचान, कारोबार का पता, फोन की वास्तविक स्थिति, भुगतान की शर्तें और डिलीवरी की समयसीमा की पुष्टि करना जरूरी है। संभव हो तो सुरक्षित भुगतान माध्यम अपनाएं और लेन-देन से जुड़े सभी रिकॉर्ड संभालकर रखें।
फिलहाल, उपलब्ध जानकारी के आधार पर यह स्पष्ट नहीं है कि इस मामले में कोई शिकायत दर्ज हुई है या संबंधित विक्रेता के खिलाफ कार्रवाई शुरू की गई है। इसलिए इसे धोखाधड़ी का साबित मामला कहने के बजाय सामने आए आरोपों और दावों के रूप में देखना उचित होगा।